
वास्तु और आयुर्वेद में जमीन पर पालथी मारकर बैठकर खाना सबसे उत्तम तरीका बताया गया है। इसे सुखासन की मुद्रा कहा जाता है। इस मुद्रा में बैठने से शरीर का संतुलन बना रहता है। पाचन तंत्र मजबूत होता है और भोजन ठीक से पचता है। पृथ्वी तत्व से सीधा जुड़ाव रहने से मन शांत रहता है। पुरानी परंपरा में यही तरीका स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता था।

2/8वास्तु के अनुसार, कभी भी नंगे फर्श या जमीन पर सीधे बैठकर भोजन नहीं करना चाहिए। भोजन करते समय सूती, ऊनी या कुशा के आसन का इस्तेमाल करें। नंगे फर्श पर बैठने से शरीर की सकारात्मक ऊर्जा जमीन में चली जाती है। आसन बिछाने से ऊर्जा सुरक्षित रहती है और भोजन का प्रभाव शरीर पर बेहतर पड़ता है। छोटी सी सावधानी से बड़ा फायदा होता है।

3/8जमीन पर बैठकर खाते समय थाली को सीधे जमीन पर ना रखें। छोटी चौकी या स्टैंड पर थाली रखना बेहतर माना गया है। थाली का स्थान बैठने की जगह से थोड़ा ऊंचा होना चाहिए। इससे भोजन के प्रति सम्मान का भाव बना रहता है। ऊंचाई पर रखने से खाने की मुद्रा भी सही रहती है और पाचन ठीक रहता है। यह छोटा नियम घर में अनुशासन लाता है।

4/8डाइनिंग टेबल का आकार चौकोर या आयताकार होना चाहिए। गोल टेबल को ऊर्जा संतुलन के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है। डाइनिंग रूम या टेबल को घर के पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना शुभ है। भोजन करते समय परिवार के सदस्यों का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। सही दिशा और आकार से भोजन का माहौल सकारात्मक बना रहता है।

5/8डाइनिंग टेबल के सामने दर्पण लगाना शुभ माना गया है। दर्पण में भोजन दिखाई दे, तो घर में अन्न और धन की वृद्धि होती है। इसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। दर्पण साफ और सही ऊंचाई पर होना चाहिए। इससे कमरे में ऊर्जा का विस्तार होता है और परिवार का भोजन सुखद वातावरण में होता है।

6/8पूर्व दिशा को सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य की दिशा माना जाता है। इस दिशा में मुख करके भोजन करने से पाचन बेहतर रहता है। उत्तर दिशा ज्ञान और धन से जुड़ी है, इसलिए विद्यार्थी और नौकरीपेशा लोगों के लिए शुभ मानी जाती है। पश्चिम दिशा व्यापारियों के लिए लाभकारी बताई गई है। सही दिशा चुनने से स्वास्थ्य और काम दोनों में लाभ मिलता है।

7/8दक्षिण दिशा को यम और पितरों की दिशा माना गया है। इस दिशा में मुख करके भोजन करना शुभ नहीं माना जाता है। कहा जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। भोजन के समय दक्षिण मुख से बचना चाहिए। अन्य दिशाओं को प्राथमिकता देने से मन हल्का रहता है। यह सावधानी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।

8/8जमीन पर आसन बिछाकर बैठना हो या डाइनिंग टेबल पर, नियमों का पालन करना जरूरी है। सही मुद्रा, दिशा और सम्मान का भाव रखने से भोजन का लाभ पूरा मिलता है। परिवार के साथ शांति से खाने का अभ्यास करें। वास्तु के ये छोटे उपाय सेहत को मजबूत रखते हैं और घर में सुख-समृद्धि का माहौल बनाते हैं। आदत डालने से फर्क साफ दिखने लगता है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
