shardh 2019: is tarah karein shradh janein kaun kar sakta hai pitru paksha mein pitrs ka tarpana in chezzon se trapt hote hain pitrs - इस तरह करें श्राद्ध, जानें कौन कर सकता है तर्पण, इन चीजों से होती है पितृों की तृप्ति 1 DA Image

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इस तरह करें श्राद्ध, जानें कौन कर सकता है तर्पण, इन चीजों से होती है पितृों की तृप्ति

कार्यालय संवाददाता, अलीगढ़े
sarva pitru amavasya 2018 (image credits: AstroSage Magazine)
ओम आगच्छन्तु मे पितर एवं ग्रहन्तु जलान्जलिम हे पितरों! पधारिये पितरों तथा जलांजलि ग्रहण कीजिए। पितृपक्ष में पितर स्वर्ग से उतरकर धरती पर वाश करेंगे। इस बार सोलह के स्थान पर चौदह दिन के ही श्राद्ध हैं। श्राद्धपक्ष अपने कुल, अपनी परंपरा, पूर्वजों के श्रेष्ठ कार्यों का स्मरण करने और उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प लेने के दिन है।
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भाद्र पक्ष की पूर्णिमा से प्रारम्भ होकर श्राद्ध पक्ष आश्विन मास की अमावस्या तक होते हैं। पूर्णिमा का श्राद्ध उनका होता है, जिनकी मृत्यु वर्ष की किसी पूर्णिमा को हुई हो। वैसे, ज्ञात, अज्ञात सभी का श्राद्ध आश्विन अमावस्या को किया जाता है। व्यक्ति का अपने पितरों के प्रति श्रद्धा के साथ अर्पित किया गया तर्पण अर्थात जलदान पिंडदान पिंड के रूप में पितरों को समर्पित किया गया भोजन यही श्राद्ध कहलाता है। देव, ऋषि और पितृ ऋण के निवारण के लिए श्राद्ध कर्म है। अपने पूर्वजों का स्मरण करने और उनके मार्ग पर चलने और सुख-शांति की कामना ही वस्तुत: श्राद्ध कर्म है।
ज्योतिष संस्थान के आचार्य लवकुश शास्त्री ने बताया कि श्राद्ध केवल तीन पीढ़ियों तक का ही होता है। धर्मशास्त्रों के मुताबिक सूर्य के कन्या राशि में आने पर परलोक से पितृ अपने स्वजनों के पास आ जाते हैं। देवतुल्य स्थिति में तीन पीढ़ी के पूर्वज गिने जाते हैं। पिता को वसु के समान, रुद्र दादा के समान और परदादा आदित्य के समान माने गए हैं। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि मनुष्य की स्मरण शक्ति केवल तीन पीढ़ियों तक ही सीमित रहती है।
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जल और तिल ही क्यों : श्राद्ध पक्ष में जल और तिल (देवान्न) द्वारा तर्पण किया जाता है। जो जन्म से लय(मोक्ष) तक साथ दे, वही जल है। तिलों को देवान्न कहा गया है। ऐसा माना जाता है कि इससे ही पितरों को तृप्ति होती है।
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कौन कर सकता है तर्पण: पुत्र, पौत्र, भतीजा, भांजा कोई भी श्राद्ध कर सकता है। जिनके घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं है लेकिन पुत्री के कुल में हैं तो धेवता और दामाद भी श्राद्ध कर सकते हैं। पंडित द्वारा भी श्राद्ध कराया जा सकता है। पितृ अमावस्या : जिनकी मृत्यु तिथि याद नहीं रहती या किन्ही कारण से हम श्राद्ध नहीं कर पाते, एसे ज्ञात-अज्ञात सभी लोगों का श्राद्ध पितृ अमावस्या को किया जा सकता है। इस दिन श्राद्ध कर्म अवश्य करना चाहिए। इसके बाद ही पितृ हमसे विदा लेते हैं।
कैसे करें श्राद्ध: पहले यम के प्रतीक कौआ, कुत्ते और गाय का अंश निकालें (इसमें भोजन की समस्त सामग्री में से कुछ अंश डालें) फिर किसी पात्र में दूध, जल, तिल और पुष्प लें। कुश और काले तिलों के साथ तीन बार तर्पण करें। ऊं पितृदेवताभ्यो नम: पढ़ते रहें। वस्त्रादि जो भी आप चाहें पितरों के निमित निकाल कर दान कर सकते हैं। यह सोलह या 15 दिन शोक के होते हैं। अपने पितरों को याद करने के होते हैं। इसलिए, इन दिनों मांगलिक कार्य, गृह प्रवेश, देव स्थापना के कार्य वर्जित हैं। प्रतिदिन श्रद्धा से अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध कर पितरों के तृप्त होने के साथ ही घर-परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करें। -आचार्य लवकुश शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
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