
हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा करने से शनि, राहु-केतु जैसे ग्रहों के दुष्प्रभाव भी कम हो जाते हैं। जो भक्त सच्चे मन से शनिवार को हनुमान जी की पूजा करते हैं, उन्हें संकटों से मुक्ति, बल-बुद्धि में वृद्धि और शनि पीड़ा से राहत मिलती है। आइए जानते हैं शनिवार को हनुमान जी की पूजा-अर्चना कैसे करें।

2/8शनिवार को प्रातःकाल स्नान करके साफ और लाल रंग के वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें और पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें। शुक्रवार रात और शनिवार को ब्रह्मचर्य का पालन करें। हाथ में जल लेकर पूजा का संकल्प लें। इससे मन एकाग्र होता है और पूजा का फल बढ़ता है।

3/8हनुमान जी की पूजा सूर्योदय के बाद या शाम के समय सूर्यास्त के आसपास करनी चाहिए। इन दोनों समयों में पूजा करने से विशेष फल मिलता है। शाम का समय अधिक शुभ माना जाता है क्योंकि इस दौरान ऊर्जा का संचार मजबूत होता है।

4/8पूजा के लिए लाल फूल, गुलाब, गुड़हल, सिंदूर, चमेली का तेल, गुड़, चना, कपूर, धूप, नारियल, घी का दीपक, लाल लंगोट, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड की पुस्तक तैयार रखें। ये सामग्री हनुमान जी को अत्यंत प्रिय है।

5/8सबसे पहले शुभ मुहूर्त में हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें। 'ॐ श्री हनुमते नमः' मंत्र का जाप करते हुए पूजा शुरू करें। सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें, फिर लाल फूल चढ़ाएं। गुड़, चना और नारियल का भोग लगाएं। लाल लंगोट अर्पित करने के बाद 'ॐ हं हनुमते नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ करें। अंत में आरती करके पूजा समाप्त करें।

6/8पौराणिक कथा के अनुसार, जब हनुमान जी लंका गए थे, तो उन्होंने शनिदेव को रावण के बंदीगृह से मुक्त किया था। तब शनिदेव ने वरदान दिया कि जो व्यक्ति हनुमान जी की पूजा करेगा, उसे वे कभी परेशान नहीं करेंगे। इसलिए शनिवार को हनुमान जी की पूजा करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम हो जाता है।

7/8शनिवार को हनुमान जी की पूजा करने से भय, भूत-प्रेत बाधा और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। शनि दोष मिटता है, साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। नौकरी, परीक्षा या कोर्ट-कचहरी में सफलता मिलती है। शनि की कृपा स्वतः प्राप्त हो जाती है और जीवन में शांति एवं समृद्धि आती है।

8/8शनिवार को हनुमान जी की पूजा सच्ची श्रद्धा और सही विधि से करें। इससे बजरंगबली के साथ शनि देव भी प्रसन्न होते हैं और जीवन की सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं। नियमित पूजा से बल, बुद्धि और सुख-समृद्धि बढ़ती है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
