Shaniwar Ke Niyam: साढ़ेसाती-ढैय्या या कुंडली में खराब है शनि की स्थिति, तो शनिवार को करें इन 5 मंत्रों का जाप

शनि देव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है। जब कुंडली में शनि की स्थिति कमजोर हो, साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, तब जीवन में कई तरह की परेशानियां आती हैं। ऐसे में शनिवार का दिन शनि दोष को शांत करने का सबसे उत्तम होता है। इस दिन कुछ नियमों और मंत्रों का जाप करने से शनि की कृपा प्राप्त होती है।

Navaneet RathaurJun 26, 2026 10:06 pm IST
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शनिवार को शनि उपाय का महत्व

शनिवार शनि देव का दिन है। इस दिन किए गए उपाय शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने में बहुत प्रभावी होते हैं। शनि देव जब प्रसन्न होते हैं, तो व्यक्ति को अनुशासन, धैर्य और सफलता देते हैं। लेकिन जब वे क्रोध में होते हैं, तो आर्थिक हानि, स्वास्थ्य समस्या और मानसिक तनाव बढ़ा देते हैं। इसलिए शनिवार को विशेष सावधानी और उपाय करना बहुत जरूरी है।

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शनिवार के मुख्य नियम

शनिवार को काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। काला तिल, उड़द, गुड़ और सरसों का तेल दान करना शुभ होता है। पीपल के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और 7 बार परिक्रमा करें। हनुमान जी की पूजा करें, क्योंकि शनि देव हनुमान भक्ति से प्रसन्न होते हैं। झूठ, क्रोध और किसी का अपमान करने से बचें। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से शनि का अशुभ प्रभाव कम होता है।

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शनि मूल मंत्र

शनि दोष शांत करने के लिए सबसे सरल और प्रभावी मंत्र है 'ॐ शं शनैश्चराय नमः'। इस मंत्र का रोज शनिवार को 108 बार जाप करें। इससे शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और साढ़ेसाती के कष्ट कम होते हैं।

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शनि बीज मंत्र

शनि बीज मंत्र 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' अत्यंत शक्तिशाली है। इस मंत्र का जाप करने से शनि की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और व्यक्ति को मजबूती मिलती है। शनिवार को इस मंत्र का 108 या 1008 बार जाप करना विशेष फलदायी होता है।

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शनि गायत्री मंत्र

शनि गायत्री मंत्र 'ॐ सूर्यात्मजाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नः सौरिः प्रचोदयात्' शनि देव की पूजा में बहुत महत्वपूर्ण है। इसका जाप करने से बुद्धि तेज होती है और शनि संबंधी सभी दोषों से मुक्ति मिलती है।

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शनि प्रणाम मंत्र

शनि प्रणाम मंत्र 'ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छाया मार्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥' शनि देव को प्रणाम करने का सबसे अच्छा मंत्र है। रोज इस मंत्र का जाप करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति पर उनकी कृपा बनी रहती है।

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शनि वैदिक मंत्र

शनि वैदिक मंत्र 'ॐ शन्नोदेवीर भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः' शनि की पूजा में विशेष रूप से उपयोगी है। इसका जाप शनिवार को करने से स्वास्थ्य, धन और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

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शनि मंत्र के जाप से मिलने वाले लाभ

इन मंत्रों और नियमों का नियमित पालन करने से शनि दोष कम होता है, साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव घटता है। व्यक्ति के जीवन में शांति, आर्थिक स्थिरता और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। शनि देव की कृपा से व्यक्ति अनुशासित और सफल बनता है। हालांकि, इन मंत्रों का जाप करने से पहले एक बार योग्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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