रत्नशास्त्र: मन रहता है अशांत और छोटी-छोटी बात पर आता है गुस्सा? ये रत्न बढ़ाएगा मानसिक शांति और आत्मविश्वास

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आना और मन का अशांत रहना आम समस्या बन गई है। कई लोग बाद में पछताते हैं, लेकिन गुस्से पर काबू नहीं पा पाते हैं। ज्योतिष शास्त्र में ऐसे लोगों के लिए मोती रत्न को बहुत प्रभावशाली माना गया है।

Navaneet RathaurJun 01, 2026 11:04 pm IST
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मोती रत्न

मोती रत्न चंद्र ग्रह से जुड़ा है, जो हमारे मन, भावनाओं और मानसिक संतुलन का कारक है। सही तरीके से धारण करने पर यह रत्न गुस्से को कम करता है, मन को शांत रखता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है। आइए जानते हैं इस रत्न के बारे में सबकुछ विस्तार से।

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मोती रत्न का महत्व

मोती को सबसे सौम्य लेकिन शक्तिशाली रत्नों में गिना जाता है। चंद्रमा की कमजोर स्थिति वाले लोगों में चिड़चिड़ापन, तनाव, अनिद्रा और भावनात्मक अस्थिरता आम होती है। मोती इन समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। यह ना सिर्फ मन को शांत करता है, बल्कि सोचने की शक्ति भी बढ़ाता है, जिससे फैसले लेना आसान हो जाता है।

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गुस्सा और तनाव कम करने में फायदेमंद

जो लोग छोटी-छोटी बात पर भड़क जाते हैं या मन में लगातार नकारात्मक विचार आते रहते हैं, उनके लिए मोती बहुत लाभकारी साबित होता है। यह भावनाओं में स्थिरता लाता है, घबराहट कम करता है और मनोबल बढ़ाता है। नियमित रूप से मोती धारण करने वाले लोगों में धैर्य बढ़ता है और वे छोटी घटनाओं को ज्यादा महत्व नहीं देते हैं। नींद भी गहरी और अच्छी आती है, जिससे पूरे दिन तरोताजा महसूस होता है।

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किन राशि वालों को पहनना चाहिए मोती?

ज्योतिष के अनुसार कर्क, मीन, वृश्चिक और मेष राशि वाले लोगों के लिए मोती विशेष रूप से शुभ है। खासकर उन लोगों को मोती पहनना चाहिए जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर, पीड़ित या नीच राशि में हो। ऐसे लोगों में अक्सर चिंता, गुस्सा और भावनात्मक उतार-चढ़ाव देखा जाता है। मोती इन राशियों के जातकों को मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है।

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मोती धारण करने का सही समय और विधि

मोती पहनने का सबसे अच्छा दिन सोमवार है। इसे धारण करने से पहले शुद्धि जरूर करें। गंगाजल, दूध और शहद के मिश्रण में कुछ देर रखकर शुद्ध करें। फिर 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। मंत्र जप के बाद मोती को भगवान शिव के चरणों में अर्पित कर पहनें। पूर्णिमा के दिन या सोमवार की सुबह इसे धारण करना बेहद शुभ माना जाता है।

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किस धातु और उंगली में पहनें मोती?

मोती को चांदी में जड़वाकर पहनना सबसे उत्तम है। चांदी चंद्रमा की ऊर्जा को और मजबूत करती है। इसे छोटी उंगली यानी कनिष्ठा में पहनना चाहिए। कर्क, मीन, वृश्चिक और मेष राशि वालों के लिए छोटी उंगली में मोती धारण करना विशेष फलदायी होता है।

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रचनात्मक क्षेत्र में मोती के लाभ

कला, लेखन, संगीत, अभिनय या किसी भी रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोग मोती पहनकर अच्छा लाभ ले सकते हैं। यह रत्न कल्पनाशक्ति बढ़ाता है और मन को शांत रखकर बेहतर काम करने की क्षमता देता है। व्यापार या करियर में भी मोती मानसिक स्पष्टता और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाता है।

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मोती पहनने से पहले ये सावधानियां

हर रत्न की तरह मोती भी बिना सलाह के नहीं पहनना चाहिए। अगर कुंडली में चंद्रमा पहले से ही बहुत मजबूत है, तो मोती पहनने से बचें, क्योंकि इससे भावनाओं का अतिरेक हो सकता है। गलत समय, गलत धातु या गलत उंगली में पहनने पर उल्टा असर भी पड़ सकता है। इसलिए हमेशा किसी अनुभवी ज्योतिषी से अपनी कुंडली दिखाकर ही मोती धारण करें।

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बेहद शक्तिशाली रत्न है मोती

मोती एक ऐसा रत्न है जो सिर्फ गहना नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य का सहारा बन सकता है। अगर आपका मन अशांत रहता है, छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आता है या फैसले लेने में कठिनाई होती है, तो सही विधि से मोती धारण करके आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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