
काशी यानी वाराणसी में रंगभरी एकादशी से ही होली का उत्सव शुरु हो जाता है। मान्यता के हिसाब से जब विवाह के बाद भगवान शिव मां पार्वती को लेकर काशी पहुंचे थे तो उनके स्वागत में देवी-देवताओं ने उनके साथ रंग और फूलों वाली होली खेली थी। इसी वजह से हर फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने एकादशी पर ही काशी में होली खेली जाती है। इसके ठीक बाद ही यहां पर मसान की होली खेली जाती है।

2/8मसान की होली को लेकर एक पौराणिक कथा ये है कि देवी-देवताओं संग होली खेलने के बाद अगले दिन भगवान शिव ने श्मशान घाट में भूत-प्रेत और पिशाचों के साथ भस्म से होली खेली थी। इसी वजह से काशी में रंगभरी एकादशी के ठीक अगले दिन मसान होली खेली जाती है।

3/8मसान की होली से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो मन में जिज्ञासा जरूर पैदा करते हैं। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मनाई जाने वाली मसान होली महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर खेली जाती है। माना जाता है कि भगवान शिव यहां पर आकर अपने परम भक्तों के साथ होली खेलते हैं। कई लोग मसान होली को चिता भस्म की होली भी कहते हैं। दरअसल मसान की होली में रंग के साथ-साथ भस्म का भी इस्तेमाल किया जाता है।

4/8परंपरा के अनुसार मसान की होली में अघोरी परंपरा से जुड़े लोग शामिल होते हैं। वहीं नागा साधु और साधु-संत भी इस होली में शामिल होते हैं। कहा जाता है कि ये लोग मसान होली को जीवन और मृत्यु के सच को स्वीकार कहने का प्रतीक मानते हैं।

5/8जब भी आपने मसान की होली की तस्वीरें या फिर वीडियो देखी होंगी तो पाया होगा कि बहुत सारे गृहस्थ लोग भी इस होली में शामिल होते हैं लेकिन ये कितना सही है? इस पर कम ही बात होती है।

6/8बता दें कि मसान वाली होली आम होली से काफी अलग होती है। हालांकि कुछ लोकल लोग और श्रद्धालु भी इसमें शामिल होते हैं। वहीं इन दिनों क्रिएटर्स भी अपने कंटेंट के लिए इस होली में शामिल होते हैं। मसान की होली सिर्फ और सिर्फ आस्था और परंपरा से जुड़ा आयोजन है। यहां पर हंसी-मजाक वाली होली नहीं बल्कि बहुत ही गंभीर होली खेली जाती हैं। ऐसे में इसमें सिर्फ अघोरियों के साथ-साथ साधु-संत और नागा-साधु लोगों को ही शामिल होने देना चाहिए।

7/8सिर्फ रोमांच के चक्कर में मसान की होली में शामिल नहीं होना चाहिए। बिना सही जानकारी के भीड़ का हिस्सा बनने से हर किसी को बचना चाहिए। ध्यान रखने वाली बात ये है कि मसान की होली महाश्मशान यानी मणिकर्णिका घाट पर होती है। ये बहुत ही पवित्र और संवेदनशील जगह है जहां की एनर्जी अलग ही लेवल की होती है।

8/8रखें इस बात का ध्यान गृहस्थों को ये समझना होगा कि ये मनोरंजन के लिए या फिर ट्रे़ंड के लिए नहीं है। सोशल मीडिया पर यहां के विजुअल्स को डालने से बचना चाहिए। इस जगह की गरिमा और आस्था को समझकर चीजों का ढिंढोरा नहीं पीटना चाहिए। अगर आप मसान की होली की देखना चाहते हैं तो इसे दूर के खड़े होकर देख सकते हैं। सलाह तो यही दी जाती है कि गृहस्थों के गंगा के दूसरे पार से मसान की होली को देखना सही रहता है। ये विशेष रूप की साधना और श्रद्धा से जुड़ी हुई परंपरा है। ऐसे में इसमें सोच-समझकर ही हिस्सा लेना चाहिए।
