3, 5 या 7...कलाई पर कितनी बार लपेटकर कलावा बांधना शुभ होता है? जानिए सही नियम

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और अनुष्ठानों के दौरान कलावा बांधने की परंपरा है। कलावा सिर्फ एक लाल-सफेद धागा नहीं, बल्कि रक्षा सूत्र है जो व्यक्ति को नेगेटिव एनर्जी, बुरी नजर और संकटों से बचाता है। मान्यता है कि जिसकी कलाई में कलावा बंधा होता है, उस पर देवी-देवताओं की विशेष कृपा रहती है।

Navaneet RathaurMay 15, 2026 06:19 pm IST
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कलावा का महत्व

कलावा को रक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। पंडित जी मंत्रोच्चारण के साथ इसे बांधते हैं। यह सूत्र व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सुरक्षित रखता है। आज हम आपको कलावा का महत्व और इसे बांधने का सही तरीका बताएंगे।

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पौराणिक कथाएं

भविष्य पुराण के अनुसार, देवताओं और असुरों के युद्ध के समय देवराज इंद्र असुरों से लड़ रहे थे। तब उनकी पत्नी इंद्राणी ने उनकी रक्षा और विजय की कामना से उनके दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र बांधा था। इसी रक्षा सूत्र के प्रभाव से इंद्र को विजय मिली। तभी से कलावा बांधने की परंपरा चली आ रही है। एक अन्य कथा के अनुसार, देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु के लिए राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधा था। इन पौराणिक घटनाओं से कलावा को पवित्र और शक्तिशाली माना जाने लगा।

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कलावा बांधने के नियम

कलावा बांधते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूर है। सबसे पहले, हाथ खाली नहीं होना चाहिए। हाथ में अक्षत जरूर रखें। संभव हो, तो थोड़ी दक्षिणा भी रख लें। कलावा बंधवाने के बाद दक्षिणा पंडित जी को दे दें। कलावा बंधवाते समय सिर को ढकना शुभ माना गया है। अगर रुमाल ना हो, तो दूसरे हाथ से सिर को ढक सकते हैं।

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कलाई पर कलावा कितनी बार लपेटना चाहिए?

कलावा को हमेशा विषम संख्या में लपेटना चाहिए। 3, 5 या 7 बार कलावा लपेटना सबसे शुभ माना जाता है। विषम संख्या सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य को बढ़ाती है। सम संख्या यानी 2, 4 या 6 में कलावा बांधना अशुभ होता है। ज्यादातर लोग 3 या 5 बार लपेटते हैं।

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कलावा बांधने के लाभ

कलावा बांधने से व्यक्ति को मानसिक शक्ति, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यह बुरी नजर, नकारात्मक शक्तियों और संकटों से रक्षा करता है। नियमित रूप से कलावा बांधने वाले व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है और शुभ कार्यों में सफलता मिलती है।

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इन बातों का रखें ध्यान

कलावा बांधने के बाद इसे सम्मान के साथ रखें। जब यह गंदा हो जाए या 21 दिनों के बाद इसे उतारकर किसी पवित्र जगह या पीपल के नीचे रख दें। इसके बाद नियमों के अनुसार नया कलावा हाथ में बांधे। कलावा कभी भी फेंकना नहीं चाहिए। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

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सही नियमों के साथ बांधे कलावा

कलावा बांधना सिर्फ एक रिवाज नहीं, बल्कि आस्था, सुरक्षा और सकारात्मकता का प्रतीक है। सही नियमों के साथ इसे बांधने से जीवन में शांति, सुरक्षा और सौभाग्य बना रहता है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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