
धार्मिक परंपरा में हरतालिका तीज की पूजा का एक खास हिस्सा मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की मूर्ति बनाना भी है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भी इसी तरह भगवान शिव की आराधना की थी। अगर आप घर पर मूर्ति बनाने जा रही हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

2/8हरतालिका तीज की पूजा के लिए मूर्ति बनाने वाली बालू या मिट्टी साफ जगह से लेनी चाहिए। धार्मिक परंपरा में पवित्र नदी या स्वच्छ जलस्रोत की बालू को इसके लिए उपयुक्त माना गया है। अगर ऐसा बालू नहीं मिल रहा है, तो साफ मिट्टी का इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी में कंकड़ या दूसरी गंदगी हो तो उसे पहले अच्छी तरह छान लेना चाहिए।

3/8बालू को साफ करने के बाद उसका शुद्धिकरण करना जरूरी होता है। इसके लिए उसमें थोड़ा गंगाजल मिला दें। कुछ लोग शुद्ध मिट्टी में दूध मिलाकर भी मूर्ति तैयार करते हैं। इसके बाद बालू को अच्छी तरह गूंथ लें, ताकि वह आसानी से आकार ले सके। मूर्ति बनाते समय मन को शांत रखें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा की तैयारी करें।

4/8मूर्ति बनाने के लिए सबसे पहले एक साफ चौकी तैयार करें। उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर पूजा की जगह बनाएं। इसके बाद उसी स्थान पर बालू से शिवलिंग और माता पार्वती की मूर्ति तैयार करें। चाहें तो साथ में भगवान गणेश की छोटी मूर्ति भी बना सकते हैं। मूर्ति को सीधे जमीन पर रखने के बजाय चौकी पर रखना बेहतर माना जाता है।

5/8पार्थिव शिवलिंग बनाते समय उसके आकार और दिशा का भी ध्यान रखा जाता है। परंपरा के अनुसार, शिवलिंग के साथ अरघा बनाया जाता है और उसका जल निकास उत्तर दिशा की ओर रखा जाता है। माता पार्वती की मूर्ति शिवलिंग के पास स्थापित की जाती है। पूजा के दौरान मूर्तिओं का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है।

6/8मूर्ति बनाते समय अगर बालू का शिवलिंग या माता पार्वती की मूर्ति टूट जाए या उसमें दरार पड़ जाए, तो उसकी पूजा नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में पुरानी बालू को सम्मानपूर्वक अलग करके नई मूर्ति बनाई जा सकती है। मूर्ति को बनाते समय जल्दबाजी ना करें, क्योंकि बालू का आकार आसानी से बिगड़ सकता है। हाथों और पूजा की जगह की स्वच्छता का भी ध्यान रखें।

7/8हरतालिका तीज की पूजा में केवल मूर्ति बनाना ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता है, बल्कि पूजा करने वाले व्यक्ति का मन और भाव भी खास होते हैं। इसलिए मूर्ति बनाते समय साफ-सफाई रखें और भगवान शिव के मंत्र का जाप कर सकती हैं। पूजा की चौकी को ऐसी जगह रखें, जहां पैर या गंदगी आसानी से ना पहुंचे।

8/8हरतालिका तीज की पूजा और रात्रि जागरण पूरा होने के बाद ही बालू की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है। अगले दिन सुबह पूजा और आरती पूरी करने के बाद मूर्ति को सम्मानपूर्वक चौकी से हटाएं। इसके बाद किसी पवित्र जलस्रोत में विसर्जन करें। घर पर विसर्जन करना हो, तो बड़े गमले में स्वच्छ जल डालकर भी यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। विसर्जन के बाद भगवान शिव और माता पार्वती से परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
