
रत्न शास्त्र के अनुसार, ग्रहों को ठीक करने के लिए केवल रत्न पहन लेना ही पर्याप्त नहीं माना जाता है। इसे पहनने के बाद कुछ सावधानियां रखने की भी सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं रत्न धारण करने के बाद उसका भरपूर फायदा लेने के लिए हमें किन बातों से बचना चाहिए।

2/9ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, रत्न तभी धारण करना चाहिए, जब वह अच्छी स्थिति में हो। अगर पहनने के दौरान उसमें दरार आ जाए, चटक जाए या उसका कोई हिस्सा टूट जाए, तो उसे उतार देना चाहिए। ऐसे रत्न को पहले किसी जानकार ज्योतिषी को दिखाना बेहतर रहता है। टूटे हुए रत्न को पहने रहना सही नहीं माना जाता है।

3/9रत्न पहनने के बाद उसे बार-बार उतारना और फिर पहनना भी उचित नहीं माना जाता है। हालांकि, सभी रत्नों के नियम एक जैसे नहीं होते हैं। कुछ रत्न लगातार पहनने की सलाह दी जाती है, जबकि कुछ विशेष परिस्थितियों में उतारने पड़ सकते हैं। आप जिस उद्देश्य और विधि से रत्न धारण किए हैं, उसी के अनुसार उसे रखें और पहनें।

4/9पहले से किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा पहने गए रत्न को सीधे अपने हाथ में धारण करने से बचना चाहिए। ज्योतिषीय परंपरा में रत्न को व्यक्ति की कुंडली और ग्रहों से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए किसी रिश्तेदार या दोस्त का पहना हुआ रत्न अपने लिए शुभ मान लेना ठीक नहीं है। इसी तरह अपना पहना रत्न भी किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए देने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

5/9रत्नों से जुड़े खानपान के नियम हर जगह और हर रत्न के लिए समान नहीं बताए गए हैं। बता दें कि रत्न धारण करने के बाद खानपान और व्यवहार में संयम रखने की बात कही जाती है। खासतौर पर यदि किसी ज्योतिषी ने किसी विशेष रत्न के साथ कोई परहेज बताया है, तो उसे नजरअंदाज ना करें।

6/9ज्योतिषीय मान्यताओं में पूजा और रत्न धारण करने के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की बात कही जाती है। हालांकि, हर परिस्थिति में रत्न उतारना जरूरी हो, ऐसा कोई सामान्य नियम नहीं है। रोजमर्रा के जीवन में इसे सुरक्षित और साफ रखना अधिक व्यावहारिक है। यदि किसी खास धार्मिक अवसर या परंपरा के तहत रत्न उतारने की सलाह दी गई है, तो उसी नियम का पालन किया जा सकता है।

7/9एक साथ कई रत्न पहनने से पहले उनकी आपसी संगति देखना जरूरी माना जाता है। ज्योतिष में अलग-अलग रत्नों का संबंध अलग ग्रहों से बताया गया है और कुछ ग्रहों को एक-दूसरे का विरोधी माना जाता है। उदाहरण के लिए नीलम शनि और माणिक सूर्य से संबंधित माने जाते हैं। इसलिए इन्हें साथ पहनने से पहले कुंडली देखकर सलाह लेना बेहतर है। केवल रत्नों की सुंदरता देखकर उनका संयोजन तय ना करें।

8/9किसी दूसरे व्यक्ति को रत्न से फायदा हुआ है, इसका मतलब यह नहीं कि वही रत्न आपके लिए भी सही होगा। ज्योतिष में रत्न चुनने के लिए कुंडली, ग्रहों की स्थिति और व्यक्ति की दशा जैसे पहलुओं को देखा जाता है। इसलिए केवल नाम, राशि या किसी सोशल मीडिया सलाह के आधार पर महंगा रत्न खरीदने से बचें।

9/9रत्न खरीदते समय उसकी चमक और कीमत से ज्यादा उसकी गुणवत्ता और सही चुनाव पर ध्यान देना चाहिए। बाजार में कई तरह के प्राकृतिक, उपचारित और कृत्रिम पत्थर मिलते हैं। इसलिए खरीदारी करते समय विश्वसनीय विक्रेता से प्रमाणित रत्न लेना बेहतर माना जाता है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
