
गरुड़ पुराण में लिखा है कि जो व्यक्ति जीते जी दूसरों को धोखा देता है, विश्वास तोड़ता है, झूठ बोलकर लाभ लेता है, उसकी आत्मा मृत्यु के बाद भी शांति नहीं पाती है। यमदूत उसे कड़े दंड देते हैं। अगले जन्म में भी उसे धोखा ही मिलता है। धोखा देने वाला कभी सुखी नहीं रहता, मौत के बाद भी उसका पीछा नहीं छूटता है।

2/7जो व्यक्ति धन, पद, सौंदर्य या ज्ञान का अभिमान करता है, दूसरों को छोटा समझता है, गरुड़ पुराण में उसके लिए कठोर सजा बताई गई है। मौत के बाद उसका घमंड यमलोक में चूर-चूर हो जाता है। अगले जन्म में उसे नीचा जीवन मिलता है। अभिमान करने वाला कभी मुक्त नहीं होता, उसका कर्म उसे जन्म-जन्मांतर सताता रहता है।

3/7गरुड़ पुराण कहता है कि जो व्यक्ति दूसरों की संपत्ति, जमीन या धन हड़पता है, अनाथ का हक मारता है, उसकी आत्मा को यमलोक में भयानक यातनाएं मिलती हैं। अगले जन्म में उसे गरीबी और अभाव भोगना पड़ता है। चोरी का कर्म मौत के बाद भी पीछा नहीं छोड़ता, आत्मा को बार-बार दंड भुगतना पड़ता है।

4/7जो व्यक्ति क्रोध में आकर हिंसा करता है, जीव-जंतु मारता है, दूसरों को कष्ट देता है, गरुड़ पुराण में उसके लिए भयंकर नरक का वर्णन है। मौत के बाद उसकी आत्मा को उसी तरह की यातनाएं मिलती हैं। क्रोध का कर्म जन्म-जन्मांतर तक पीछा करता है, जब तक प्रायश्चित ना किया जाए।

5/7गरुड़ पुराण में सबसे बड़ा पाप माता-पिता का अपमान बताया गया है। जो व्यक्ति उन्हें दुख देता है, उनकी सेवा नहीं करता, मौत के बाद उसकी आत्मा को सबसे कष्टदायक सजा मिलती है। अगले जन्म में उसे भी वही दुख भोगना पड़ता है। यह कर्म मौत के बाद भी पीछा नहीं छोड़ता है।

6/7जो व्यक्ति काम-वासना में डूबा रहता है, दूसरों की स्त्री पर बुरी नजर रखता है या लोभ में अंधा होकर पाप करता है, गरुड़ पुराण में उसके लिए कीचड़ भरे नरक का वर्णन है। मौत के बाद भी ये कर्म आत्मा को गंदगी में डुबोते रहते हैं। लोभ और काम का कर्म जन्म-जन्मांतर तक सताता है।

7/7गरुड़ पुराण की चेतावनी है - जीते जी इन कर्मों को छोड़ दें। सच्चाई, सेवा, दान, क्षमा और प्रायश्चित से ये कर्म मिट जाते हैं और मोक्ष का द्वार खुल जाता है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
