DA Image

अगली फोटो

Ganesha Chaturthi 2019: जानें किस दिन गणपति के किस रूप की होती है पूजा

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
ganesha chaturthi 2019
हिन्दु धर्म में कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से पहले भगवान गणेश का पूजन जरूर किया जाता है। गणपति को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पहचाना जाता है। देशभर में गणेश चतुर्थी (Ganesha Chaturthi) का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. जिसे विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi) भी कहा जाता है।
lord ganesha
पुराणों के अनुसार देवताओं में अग्र पूज्य शिव-पार्वती के पुत्र विनायक का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुआ। इस तिथि से भाद्रपद शुक्ल एकादशी तक श्रीगणेशोत्सव मनाया जाता है। ऐसे में पूरे सप्ताह मनाए जाने वाले इस उत्सव में किस दिन गणेश जी के किस रूप का पूजन करने से अत्यंत शुभफलकारी फल की प्राप्ति होती है, बता रहे हैं- ज्योतिषाचार्य डॉ अरुणेश कुमार शर्मा।
ganesha chaturthi 2019
प्रथम दिवस- भगवान गणेश के समुख रूप का पूजन अर्चना करना श्रेयस्कर होता है। गणपति का यह विग्रह सिंहासनारूढ़ और चतुर्भुजी है। वे अपने हाथों में मोदक पाश अंकुश लिए हैं। एक हाथ वरद मुद्रा में है। देवताओं में अग्रपूज्य का यह विग्रह समस्त संतापों संकटों को हरने वाला है।
ganesha chaturthi 2019
द्वितीय दिवस- पंचमी को गणपति के लंबोदर स्वरूप की वंदना और दर्शन करना श्रेष्ठ है। माता पार्वती ने उबटन से लंबोदर का निर्माण किया था। वात्सल्यवश संकल्पमात्र से उनमें प्राणप्रतिष्ठा हुई। इसी स्वरूप में गणेशजी ने महादेव ये भीषण युद्ध कर मातृशक्ति से जगत का परिचय कराया।
ganesha chaturthi 2019
तृतीय दिवस- षष्ठी को गजानन गणाध्यक्ष रूप को नमन स्मरण करें। क्रोध से भरे शिवजी ने त्रिशूल से लंबोदर का मस्तिष्क धड़ से छिन्न कर दिया। इससे त्रिलोक में संताप छा गया। माता पार्वती के करुण आग्रह पर भोलेनाथ गज का सिर लगाकर गणेश को गजानन स्वरूप प्रदान किया।
ganesha chaturthi 2019
शुक्ल सप्तमी को एकदंत की पूजा वंदन करें। शिवजी से न मिलने देने पर भगवान परशुराम ने गणेश पर परशु से वार कर दिया। धू उनका एक दंत टूट गया। पूर्ण परिस्थिति का भान होने पर परशुराम को क्षोभ हुआ। उन्होंने गणेश को विद्या बुद्धि ज्ञान-विज्ञान प्राप्ति का आशीष दिया। गणेश ने इसी दांत से महाभारत की रचना की।
ganesha chaturthi
शुक्ल अष्टमी को शिवगौरीनंदन के धूम्रकेतु स्वरूप का पूजन अर्चन श्रेष्ठ है। इस स्वरूप में वे नीले घोड़े पर सवार हैं। उनकी दो भुजाएं हैं। वर्ण धूम्र है। कलियुग में उनका यह स्वरूप है। भगवान धूम्रकेतु समस्त दोषों का परिहार करने वाले हैं।
ganesha chaturthi
भाद्रपद शुक्ल नवमीं को मूषक पर विराजे चतुर्भुज गणेश का पूजन सर्वकल्याणक है। द्वापर युग में उनका यह स्वरूप मान्य है। कलियुग में भी विघ्नविनाशक सर्वाधिक इसी रूप में पूजे जाते हैं। अपने भक्तों पर असीम कृपा लुटाते हैं।
ganesha chaturthi
भाद्रपद शुक्ल एकादशी को भगवान गणेश के विनायक स्वरूप का दर्शन-पूजन समस्त मनोकामनाएं पूरी करने वाला है। इस रूप् में दस भुजाओं वाले हैं। उनका यह तेजस्वीरूप सारे जगत को आलोकित करने वाला है। वरदायी है।
ganesha chaturthi
भाद्रपद शुक्ल एकादशी को भगवान गणेश के विनायक स्वरूप का दर्शन-पूजन समस्त मनोकामनाएं पूरी करने वाला है। इस रूप् में दस भुजाओं वाले हैं। उनका यह तेजस्वीरूप सारे जगत को आलोकित करने वाला है। वरदायी है।
  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Ganesha Chaturthi 2019: Know which form of Ganapati is worshiped on which day