1/6ठेकुआ छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण प्रसाद है। गेहूं का आटा, गुड़ और घी से बना यह मिठाई सूर्य देव और छठी मैया को प्रिय है। यह प्रेम, एकता और भक्ति का प्रतीक है। ठेकुआ को बांस की डाली में रखकर अर्घ्य के समय चढ़ाया जाता है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है, क्योंकि यह परिवार की सुख-शांति का वाहक है।

गन्ना छठ पूजा में छठी मैया को प्रसन्न करने का विशेष प्रसाद है। इसे बांस की डाली में रखकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। मान्यता है कि गन्ना परिवार में मिठास और समृद्धि लाता है। पौराणिक कथाओं में गन्ना छठी मैया का प्रिय माना गया है। इसे घाट पर ले जाकर चढ़ाने से परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है।

पान और सुपारी छठ पूजा में अनिवार्य हैं। सुपारी में देवी-देवताओं का वास माना जाता है, और यह पूजा को पूर्ण करता है। पान भक्ति और शुद्धता का प्रतीक है। इन्हें अर्घ्य के समय डाली में रखा जाता है। मान्यता है कि इसके बिना पूजा अधूरी रहती है, क्योंकि यह छठी मैया और सूर्य देव को समर्पण का प्रतीक है।

डाभ नींबू (बड़ा नींबू) छठ पूजा में सूर्य देव को चढ़ाया जाता है। यह प्रकृति के उपहारों का प्रतीक है और पूजा का अभिन्न हिस्सा है। इसे बांस की सूप या डाली में रखकर अर्घ्य के समय समर्पित किया जाता है। मान्यता है कि डाभ नींबू चढ़ाने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और परिवार को स्वास्थ्य और समृद्धि मिलती है।

नारियल, जिसे श्रीफल कहा जाता है, छठ पूजा में पवित्र माना जाता है। इसमें त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का वास माना जाता है। नारियल चढ़ाने से मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है और बुद्धि, मनोकामना पूर्ति और अहंकार त्याग होता है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। इसे अर्घ्य के समय डाली में रखकर सूर्य देव को अर्पित किया जाता है।

छठ पूजा में ठेकुआ, गन्ना, पान-सुपारी, डाभ नींबू और नारियल अनिवार्य हैं। ये प्रसाद सूर्य देव और छठी मैया को प्रसन्न करते हैं, जो परिवार में सुख, समृद्धि और संतान की दीर्घायु लाते हैं। इनके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। डिस्क्लेमर: यह खबर धर्मग्रंथों और विभिन्न माध्यमों पर आधारित है। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए धर्म विशेषज्ञ से सलाह लें।
