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नहाय-खाय के साथ कल से शुरू हो रहा है छठ, जानें पूजा का शुभ महूर्त और इससे जुड़ी मान्यताएं

लाइव हिन्‍दुस्‍तान टीम, नई दिल्ली
छठ
चार दिन तक चलने वाले सूर्य उपासना का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ शुरू होगा। इसके बाद खरना होगा। जिसे पूजा का दूसरा व कठिन चरण माना जाता है। इस दिन व्रती निर्जला उपवास रखेंगे और शाम को पूजा के बाद खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करेंगे। अथर्ववेद के अनुसार षष्ठी देवी भगवान भास्कर की मानस बहन हैं। प्रकृति के छठे अंश से षष्ठी माता उत्पन्न हुई हैं। उन्हें बच्चों की रक्षा करने वाले भगवान विष्णु द्वारा रची माया भी माना जाता है। इसीलिए बच्चे के जन्म के छठे दिन छठी पूजी जाती है, ताकि बच्चे के ग्रह-गोचर शांत हो जाएं। एक अन्य मान्यता के अनुसार कार्तिकेय की शक्ति हैं षष्ठी देवी। पढ़ें कब है नहाय-खाए, खरना, सायंकालीन अर्घ्य, प्रात:कालीन अर्घ्य, पूजा विधि और मान्यताएं
छठ 2018
पूजन मुहूर्त पं. दिवाकर त्रिपाठी ‘पूर्वांचली’ के अनुसार 11 नवंबर को नहाय खाय के दिन सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा। 13 नवंबर को सांयकालीन अर्घ्य दिया जाएगा। इस दिन त्रय पुष्कर योग रहेगा। इस संयोग से श्रद्धालुओं पर सूर्यदेव की विशेष कृपा होगी।
छठ 2018
पूजा विधि यह पर्व चार दिनों तक चलता है 1. इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होती है और सप्तमी को अरुण वेला में इस व्रत का समापन होता है। 2. कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को "नहा-खा" के साथ इस व्रत की शुरुआत होती है. इस दिन से स्वच्छता की स्थिति अच्छी रखी जाती है। इस दिन लौकी और चावल का आहार ग्रहण किया जाता है। 3. दूसरे दिन को "लोहंडा-खरना" कहा जाता है. इस दिन उपवास रखकर शाम को खीर का सेवन किया जाता है. खीर गन्ने के रस की बनी होती है. इसमें नमक या चीनी का प्रयोग नहीं होता। 4. तीसरे दिन उपवास रखकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. साथ में विशेष प्रकार का पकवान "ठेकुवा" और मौसमी फल चढाएं। अर्घ्य दूध और जल से दिया जाता है। 5. चौथे दिन बिल्कुल उगते हुए सूर्य को अंतिम अर्घ्य दिया जाता है. इसके बाद कच्चे दूध और प्रसाद को खाकर व्रत का समापन किया जाता है। 6. इस बार पहला अर्घ्य 13 नवंबर को संध्या काल में दिया जाएगा और अंतिम अर्घ्य 14 नवंबर को अरुणोदय में दिया जाएगा।
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छठ महापर्व की तिथि नहाय खाय- रविवार 11 नवंबर खरना- सोमवार 12 नवंबर सायं कालीन अर्घ्य- मंगलवार 13 नवंबर (सूर्यास्त : 5:26 बजे) प्रात:कालीन अर्घ्य- बुधवार 14 नवंबर (सूर्योदय : 6:32 बजे)
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यह है मान्यता छठ पूजा के बारे में कई मान्यताएं हैं। कहा जाता है राजा प्रियंवद और रानी मालिनी को कोई संतान नहीं थी। महर्षि कश्यप के कहने पर इस दंपत्ती ने यज्ञ किया। जिससे पुत्र की प्राप्ति हुई। दुर्भाग्य से नवजात मरा हुआ पैदा हुआ। राजा-रानी प्राण त्याग के लिए आतुर हुए तो ब्रह्मा की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं। उन्होंने राजा से कहा कि सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से पैदा हुई हूं। इसलिए षष्ठी कहलाती हूं। उनकी पूजा करने से संतान की प्राप्ति होगी। राजा-रानी ने षष्ठी व्रत किया और उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई।
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  • Web Title:Chhath 2018 starting with nahaye khay know shubh muhurat and significance