अक्षय तृतीया के शुभ योगों में शुरू होगी चारधाम यात्रा, जानिए गंगोत्री-यमुनोत्री से लेकर केदारनाथ का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में चारधाम यात्रा को मोक्ष प्राप्ति का सबसे प्रमुख मार्ग माना जाता है। साल 2026 में यह पवित्र यात्रा अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर शुरू होने जा रही है। 19 अप्रैल अक्षय तृतीया के दिन अभिजीत मुहूर्त, कृतिका नक्षत्र, कर्क लग्न और आयुष्मान योग जैसे शुभ संयोग इस यात्रा को और भी खास बना रहे हैं।

Navaneet RathaurApr 17, 2026 01:41 pm IST
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चारधाम यात्रा

हिंदू धर्म में मान्यता है कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ - इन चारों धामों के दर्शन से भक्तों के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। हिमालय की गोद में बसे ये चारों धाम भगवान विष्णु और भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों को समर्पित हैं। इनके दर्शन से भक्त को पुण्य, शांति और पापों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं चारधाम के महत्व।

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यमुनोत्री धाम: यमुना जी की पूजा स्थान

यमुनोत्री धाम चारधाम यात्रा का पहला पड़ाव है। यहां यमुना नदी का उद्गम स्थल है। मंदिर में मां यमुना की काले संगमरमर की मूर्ति विराजमान है। यमुनोत्री में सूर्यकुंड और दिव्य शिलाओं से निकलता गर्म पानी भक्तों को आकर्षित करता है। यमुनोत्री के दर्शन से आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

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गंगोत्री धाम: गंगा मां का उद्गम स्थल

गंगोत्री धाम गंगा नदी के उद्गम स्थल के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि राजा भागीरथ ने यहां भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी, जिससे गंगा धरती पर अवतरित हुईं। गंगोत्री मंदिर में मां गंगा की मूर्ति स्थापित है। यहां के दर्शन से भक्तों को पापों से मुक्ति और आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।

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केदारनाथ धाम: भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग

केदारनाथ धाम भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। कथा है कि पांडवों की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें यहां दर्शन दिए थे। मंदिर में शिवलिंग बैल की पीठ के आकार में विराजमान है। केदारनाथ की यात्रा अत्यंत कठिन होती है, लेकिन दर्शन मात्र से भक्तों के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।

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बद्रीनाथ धाम: भगवान विष्णु का प्रमुख धाम

बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित है। यहां नर-नारायण स्वरूप की पूजा होती है। मान्यता है कि भगवान विष्णु यहां छह महीने योगनिद्रा में रहते हैं और छह महीने जागते हैं। बद्रीनाथ में अखंड दीप जलता रहता है। इस धाम के दर्शन से भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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अक्षय तृतीया 2026 का शुभ मुहूर्त

19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया के दिन चारधाम यात्रा का शुभारंभ होगा। इस दिन बन रहे शुभ योगों के कारण यात्रा की शुरुआत अत्यंत मंगलकारी माना जा रहा है। अक्षय तृतीया पर किए गए शुभ कार्यों का फल अक्षय होता है। इसलिए इस दिन यात्रा शुरू करना भक्तों के लिए विशेष रूप से फलदायी सिद्ध होगा।

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चारधाम यात्रा की तैयारी

चारधाम यात्रा शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण होती है। इसलिए यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच करवाएं, आरामदायक जूते और गर्म कपड़े साथ रखें। यात्रा के दौरान सादगी और भक्ति भाव बनाए रखें। इस बार अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त में शुरू होने वाली इस यात्रा से भक्तों को विशेष सौभाग्य की प्राप्ति होगी। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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