Hindi Newsफोटोपंचांग-पुराणघर के मंदिर में कौन से रंग का कपड़ा बिछाना होता है शुभ?

घर के मंदिर में कौन से रंग का कपड़ा बिछाना होता है शुभ?

मंदिर घर में हो या बाहर, वो एक पवित्र स्थान है। इसके अलावा मंदिर वह स्थान है जहां हम ईश्वर से जुड़ते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। यहां लोग भगवान की पूजा-पाठ करते हैं। यदि मंदिर घर में है, तो हमें ज्योतिष व वास्तु के नियमों का पालन करना चाहिए।

Dheeraj PalOct 22, 2025 07:20 pm IST
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मंदिर का महत्व

यदि घर में मंदिर है, जो वहां चीजें भी नियम के मुताबिक रखना चाहिए। जब बात घर के मंदिर में कपड़े बिछाने की हो, तो हमें रंगों का खास ख्याल रखना चाहिए। क्योंकि ज्योतिष शास्त्र में हर रंग एक खास ग्रह या ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। मंदिर वह स्थान है जहां हम ईश्वर से जुड़ते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

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मंदिर में सही रंग कपड़े का चुनाव

धार्मिक मान्यतानुसार सही रंग का कपड़ा बिछाने से पूजा का फल पूर्ण रूप से प्राप्त होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है क्योंकि रंग हमारी एकाग्रता और मन की शांति को प्रभावित करते हैं।

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पीले रंग का कपड़ा बिछाए

घर के मंदिर में कपड़ा बिछाने के लिए पीला रंग सबसे उत्तम माना जाता है। ज्योतिष में पीला रंग देवगुरु बृहस्पति से जुड़ा हुआ है। यह रंग ज्ञान, बुद्धि, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है।

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फायदा

पीले रंग का वस्त्र बिछाने से गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होती है जिससे पूजा करने वाले को ज्ञान की प्राप्ति होती है और उसका आध्यात्मिक विकास होता है। इसके अलावा, पीले रंग के इस्तेमाल से मन में शांति और सकारात्मकता बनी रहती है जिससे ध्यान लगाना आसान हो जाता है।

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नीले रंगा का कपड़ा

इसके अलावा आप हल्के नीले या सफेद रंग का कपड़ा भी बिछा सकते हैं। सफेद रंग शांति, पवित्रता और सादगी का प्रतीक है जो पूजा-पाठ के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

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नीले रंग का कपड़ा

मान्यतानुसार हल्का नीला रंग भी मन को शांत रखने और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक होता है। ध्यान रहे कि मंदिर में हमेशा हल्के और सौम्य रंगों का ही प्रयोग करना चाहिए क्योंकि ये रंग शांति और सकारात्मकता लाते हैं।

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लाल रंग का कपड़ा

वहीं, घर के मंदिर में लाल रंग का कपड़ा भी बिछा सकते हैं। यह ऊर्जा, जोश और अग्नि तत्व का प्रतीक है। हालांकि, इसे सौभाग्य का रंग माना जाता है और यह मां दुर्गा व मां लक्ष्मी का प्रिय रंग भी है, पर इसे सीधे मंदिर के आसन पर बिछाने से अत्यधिक ऊर्जा का संचार हो सकता है जो पूजा स्थल की शांति को भंग कर सकता है खासकर अगर मंदिर उत्तर-पूर्व यानि ईशान कोण दिशा में हो।

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नोट

यह खबर सामान्य जानकारियों, धर्म ग्रंथों और विभिन्न माध्यमों पर आधारित है। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए धर्म विशेषज्ञ से उचित सलाह लें।