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Achla Saptami 2019: इस दिन भगवान भास्कर ने पहली बार प्राप्त किया था प्रकाश

प्रधान संवाददाता, पटना |
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12 फरवरी को भगवान भास्कर की जयंती सूर्य सप्तमी मनाई जाएगी। इसे अचला सप्तमी भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसी तिथि को ही भगवान भास्कर ने पहली बार प्रकाश प्राप्त किया था। इसे भानू सप्तमी , अचला सप्तमी और पुत्र सप्तमी भी कहा जाता है। भविष्य पुराण में इसे पूरे वर्ष का सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
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इस व्रत को करने से चर्मरोग, हड्डी संबंधी समस्या व कुष्ठ रोग में लाभ मिलेगा। नमक रहित भोजन से शरीर निरोग रहता है। ज्योतिषाचार्य डॉ. राजनाथ झा के अनुसार अचला सप्तमी पर सूर्य की आराधना करने से सौभाग्य, आरोग्यता, संतान सुख प्राप्त होता है। गंगा स्नान और नमक रहित भोजन करने से शरीर निरोग रहता है। पारिवारिक समृद्धि होती है।
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मान्यता है कि अचला सप्तमी पर सूर्योपासना से सालभर के रविव्रत के समान फल की प्राप्ति होती है। इस मौके पर घरों में भी व्रती पूजा-अर्चना करके कुलदेवता-कुलदेवी को खीर-पुड़ी, मिठाई का भोग लगाते हैं। गंगाघाटों पर छठ महापर्व की तरह नजारे दिखते हैं। गंगा स्नान के बाद व्रती सूर्य को अर्ध्य भी प्रदान करते हैं।
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वर, अकवन की पत्तियां सिर पर रख स्नान करें। आचार्य प्रियदर्शी के मुताबिक इस तिथि पर प्रात:काल सूर्योदय के समय सिर पर वर व अकवन की सात पत्तियां रख कर स्नान करने से सात जन्मों के पाप का नाश हो जाता है। वर्ष बाद माघ शुक्ल सप्तमी तिथि पर इस बार कृतिका व भरणी नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा, नदी तट पर जुटेंगे श्रद्धालु
अचला सप्तमी पर चावल, तिल, दूर्वा, चंदन, इत्र जल में मिलाकर उगते सूर्य को अर्घ्य प्रदान करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। अर्घ्य देते समय सूर्य के वैदिक मंत्र ऊं घृणि सूर्याय नम: का जाप करना चाहिए। वहीं गायत्री मंत्र, आदित्य हृदय स्रोत, सूर्य का मूलमंत्र का जाप करने से हजार गुना फल मिलता है।
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  • Web Title:Achla Saptami 2019: On this day Lord Bhaskar had first received the light