
बरेली : सरकार भले ही महिलाओं की सुरक्षा के लाख दावे कर ले, लेकिन रोजाना ऑटो और बस से सफर तय करने वाली बेटियां इससे इत्तेफाक नहीं रखतीं। ऑटो और बसों में सफर करने वाले शोहदे अक्सर उन्हें तंग करते हैं। बेटियों की हिफाजत के लिए प्रशासन हर रूट पर अलग ऑटो और सिटी बस चलवाए।

2/9सायमा मिर्जा : सुरक्षा अब भी बेटियों के लिए एक बड़ा मुद्दा है। भीड़ भरे चौराहों, व्यस्त बाजार, स्कूल-कालेजों के गेट पर शोहदे बेलगाम हैं, उन्हें रोकने वाला कोई भी नहीं है।

3/9रचना : बेटियों को रोजाना तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मुश्किल यह है कि छेड़छाड़ व अभद्रता की शिकायत करने पर उन्हें ही चुप रहने की सलाह दी जाती है।

4/9प्रीती : आवारा लड़के गांव देहात की लड़कियों का राह चलना मुश्किल कर देते हैं। तमाम लड़कियों को रास्ते में जबरन रोककर उनसे बद्तमीजी की जाती है। उन्हें रोकने वाला कोई भी नहीं है।

5/9फरहा : स्मार्ट सिटी बरेली में फैली गंदगी भी बड़ी समस्या है। जलभराव व गंदगी के चलते पैदल चलने वाली बेटियों को दिक्कत होती है। सफाई भी उनके लिए बड़ा मुद्दा है।

6/9समरीन : तमाम इलाकों की बेटियां डिग्री कॉलेज दूर होने के कारण पढ़ाई नहीं कर पातीं। ऐसे इलाकों में उच्च शिक्षण संस्थान खोले जाने की जरूरत है।

7/9मंतशा : जाम भी बरेली की बेटियों के लिए एक बड़ी समस्या है। रोजाना घर से कॉलेज और कॉलेज से घर के बीच ऑटो में खासा समय बर्बाद होता है।

8/9हिबा परवीन : स्कूली लड़कियों और कामकाजी महिलाओं और बेटियों के सुरक्षित सफर के लिए प्रशासन व नगर निगम को अलग ऑटो चलाने चाहिए। इससे घटनाओं पर अंकुश लगेगा।

9/9गुलफ्शा : कभी-कभी नगर निगम की लापरवाही भी बेटियों को परेशान कर देती है। सड़कों पर महीनों तक अंधेरा रहता है, राह चलने में दिक्कत होती है। मगर स्ट्रीट लाइट ठीक नहीं होती।
