
बरेली : शहर की बेटियां चाहती हैं कि हर सरकारी स्कूल-कॉलेज में प्रधानमंत्री कौशल विकास केन्द्र खुलें। जिससे गरीब घरों की बेटियां भी रोजगारपरक कोर्स करके अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। शहामतगंज के जेन कम्प्यूटर कॉलेज में गुरुवार को हिन्दुस्तान संवाद में बेटियों ने कहा कि रोजगार अब भी उनके लिए बड़ा मुद्दा है।

2/12सना : महिलाओं के लिए चल रही सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारे जाने की जरूरत है। सिस्टम और चलाने वाले लोग जरूरतमंद बेटियों के बीच नहीं पहुंच पाते। ऐसा होने तक कागजों में ही महिला कल्याण की बातें होती रहेंगी।

3/12सायमा : महिलाओं के लिए योजनाएं बनाते वक्त सरकार उनके क्रियान्वयन का रूटमैप भी बनाए। अफसरों की जिम्मेदारी तय हो और लापरवाह लोगों पर कार्रवाई हो। तभी महिलाओं-बेटियों की जिंदगी में बदलाव आएगा।

4/12हिना : सरकार ने महिलाओं के कल्याण के तमाम योजनाएं शुरू की हैं। मगर दुखद यह है कि योजनाओं का लाभ जरूरतमंद महिलाओं और बेटियों तक नहीं पहुंच पाता। ऐसी योजनाओं में आंकड़ेबाजी अधिक और काम कम होता है।

5/12साफिया : सरकार और सिस्टम को दूसरी योजनाओं की तरह महिला कल्याण की योजनाओं में भी हवा-हवाई बातें न करके जमीन पर काम करना होगा। कौशल विकास केन्द्र अगर गंभीरता से काम करें तो समाज में बड़ा बदलाव लेकर आ सकते हैं।

6/12आलिया : चौराहों, बाजारों और ऑटों में बेटियां छेड़छाड़ का शिकार होती है। बेहतर होगा कि सरकार हर जिले में बेटी प्रोटेक्शन फोर्स का गठन भी करे। जब तक सिस्टम में बैठे लोगों की मानसिकता नहीं बदलेगी, समाज को बदलने की उम्मीद करना बेइमानी है।

7/12गीतू : स्कूल कॉलेजों में रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू होने से बेटियों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आएगा। इससे जनहित की इस योजना में फर्जीवाड़ा भी बंद हो जाएगा।

8/12ललिता : छेड़छाड़ की शिकायत करने पर लोग बिना कुछ सोचे समझे बेटियों को ही गलत ठहरा देते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। अब इस सोच में बदलाव लाने की जरूरत है।

9/12साफिया : सरकार और सिस्टम को दूसरी योजनाओं की तरह महिला कल्याण की योजनाओं में भी हवा-हवाई बातें न करके जमीन पर काम करना होगा। कौशल विकास केन्द्र अगर गंभीरता से काम करें तो समाज में बड़ा बदलाव लेकर आ सकते हैं।

10/12मीरा : बेटियों को सुरक्षा के साथ अच्छी शिक्षा और रोजगार की जरूरत है। जब तक नये उद्योग नहीं लगाए जाएंगे, बेटियों के लिए रोजगार की संभावनाएं नहीं बढ़ेगी।

11/12फरहा : बेटियों को स्वावलंबी बनाने के लिए उन्हें रोजगारपरक पाठ्यक्रम पढ़ाये जाने चाहिए। स्कूल कॉलेजों में परम्परागत कोर्सेज के साथ ऐसे कोर्स भी शुरू हों।

12/12अरसला : प्रधानमंत्री कौशल विकास के जरिए लोगों को रोजगारपरक ट्रेनिंग देने की बातें होती हैं। मगर ऐसे सेंटर कभी भी जरूरतमंदों के बीच नजर नहीं आते।
