
बरेली : लड़कियों को सुरक्षा, अच्छी शिक्षा, स्वावलंबन के साथ समाज को परिवार की भूमिका उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिए चाहिए। बेटियों ने कहा कि पाठ्यक्रमों में सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण अनिवार्य करें। ताकि उनका आत्मविश्वास बढ़ सके। साहू राम स्वरूप महिला महाविद्यालय में ‘हिन्दुस्तान इन कैंपस’ के आयोजन के दौरान बेटियों ने खुलकर अपनी बात रखी।

2/12उपासना सिंह : समाज को लड़कियों और लड़कों के बीच समानता की भावना रखनी चाहिए। पहनावे पर अक्सर लड़कियों के लिए पाबंदियां होती हैं। सुरक्षा एक समस्या है पर लड़कियों को खुद सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना होगा। सरकार को भी कड़े कानून बनाने होंगे।

3/12उमर: महिलाओं को राजनीति में उचित भागीदारी दी जानी चाहिए ताकि वे महिलाओं के मुद्दे उठा सकें। गर्ल्स कॉलेजों में लगातार सेल्फ डिफेंस की कार्यशालाएं हुईं। शिक्षण संस्थाएं खोली जाएं और उसमें गुणवत्ता परक शिक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है।

4/12अलीशा : स्वरोजगार को तमाम योजनाएं चलाने की जरूरत है। लड़कियां जागरूक होंगी तो वह आत्मनिर्भर बनेंगी। महिलाओं को राजनीति में उचित भागीदारी दी जानी चाहिए ताकि वे महिलाओं के मुद्दे उठा सकें। गर्ल्स कॉलेजों में लगातार सेल्फ डिफेंस की कार्यशाला हो।

5/12शालू गुप्ता : लड़कियों के बारे में यह सोचा जाता है कि वह पढ़कर क्या करेंगी। यह सोच बदलने की जरूरत है। उनको बाहर शहरों में अच्छी शिक्षा प्राप्त करने को नहीं भेजा जाता है। लड़कियां किसी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं हैं और समाज को अपनी सोच बदलने की जरूरत है।

6/12शीतल शर्मा : हमारे देश में लड़कियों की शिक्षा एक बड़ी समस्या बनी हुई है। लड़कियों की पढ़ाई में अड़चन लगाई जाती है। लोग कहते हैं कि लड़कियों को पढ़ाकर क्या फायदा, यह सोच बलदनी होगी। सरकार और समाज दोनों को सुरक्षा और शिक्षा पर काम करना होगा।

7/12तूबा अल्ताफ : वर्तमान समय को देखते हुए सरकारों को नारी सुरक्षा के लिए अच्छे इंतजाम करने चाहिए। लड़कियां कोई समस्याएं बताएं तो उसको दूर करने के प्रयास करने चाहिए न कि लड़कियों को ही दोषारोपण कर उनको परेशान करना चाहिए।

8/12सबीना: लड़कियों को कमजोर माना जाता है पर अब यह सोच बदलनी होगी। लड़कियों को खुद अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलना होगा तभी वे सशक्त बन सकेंगी। लड़कियों के लिए दूरदराज के इलाकों में भी डिग्री कॉलेज खोलने चाहिए।

9/12डॉ. प्रीती पाठक : संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना चाहिए। अभी तक 11 प्रतिशत महिलाएं हैं और यह प्रतिशत बढ़ना चाहिए। महिलाएं ही महिलाओं की समस्या को आसानी से समझ सकती हैं। इसलिए नेतृत्व में भागीदारी मिलनी चाहिए। महिलाओं की को स्वावलंबी बनाने के लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ाएं

10/12नीरज राजपूत : समाज में लड़कियों को क्यों लड़कों से कम समझा जाता है। लड़कियां हर मामले में लड़कों से अच्छी हैं और मजबूत भी हैं। रात को स्टेशन पर लड़कियों को क्यों नहीं किसी को छोड़ने या रिसीव करने के लिए भेजा जाता है। सुरक्षित माहौल बनाने की जरूरत है। समाज को सोच बदलनी चाहिए।

11/12डॉ. फहजीन खान : प्राथमिकता सुरक्षित माहौल और शिक्षा है। शिक्षित लड़कियां कॅरियर को लेकर फैसले कर सकेंगी। लड़कियों को रोजगार देने की योजनाएं बनानी होंगी तभी वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी। महिलाएं सुरक्षित माहौल में काम और पढ़ाई कर सकेंगी तभी महिला सशक्तीकरण की अवधाराणा साकार होगी।

12/12डॉ. कनक लता : महिला अपराध जैसे छेड़खानी और ईव टीजिंग की घटनाएं आम हैं। लड़कियों को सुरक्षित माहौल न मिलने के कारण पढ़ाई तक छोड़नी पड़ती है। एजुकेशन सिस्टम को बेहतर करने की जरुरत है। लड़कियों को उच्च शिक्षित करने की सरकारी योजाएं सुरक्षा की कमी के कारण पूरी नहीं हो पाती है।
