
‘आओ राजनीति करें’ मुहिम के तहत संवाद कार्यक्रम में बरेली में बेटियों ने कहा कि महिला उत्पीड़न के ज्यादातर मामले घरों में होते हैं। ऐसे में सामाजिक जागरूकता की जरूरत है। यह भी माना कि महिलाओं के खिलाफ अपराध में महिलाएं भी शामिल होती हैं। खुद महिलाओं को इस बारे में गंभीरता से सोचना होगा।

2/12पूर्वी शर्मा : इन दिनों साइबर बुलिंग एक बड़ी समस्या है। किसी लड़की की फोटो उठाकर उसको किसी वीडियो में इस्तेमाल किया जाता है। यह साइबर अपराध है और लड़कियों को इसके प्रति भी जागरूक रहना होगा। समाज को लड़कियों और लड़कों के बीच समानता की भावना रखनी चाहिए।

3/12उर्मिला यादव : सुरक्षा के चलते आज भी काफी संख्या में लड़कियों को बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। सरकार के साथ समाज को भी लड़कियों की सुरक्षा और शिक्षा के प्रति जागरूक रहना होगा। घर में ही लड़का और लड़की के बीच भेदभाव की भावना से बचना होगा। मूल्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत है।

4/12ऊषा शर्मा : महिला अपराधों की एक प्रमुख वजह अपनी संस्कृति को भूलकर पाश्चात्य सभ्यता की ओर अंधी दौड़ है। विलासिता की चीजों ने लड़के और लड़कियों दोनों को गलत रास्ते पर ले जाने में बड़ी भूमिका निभाई है। इसकी वजह से महिला अपराध बढ़ते हैं। परिवार के लोगों को भी लड़कियों की सुरक्षा पर ध्यान देना होगा।

5/12अंशू जैन : सुरक्षा एक समस्या है पर लड़कियों को खुद सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना होगा। पुलिस को महिला अपराध की स्थिति में महिलाओं से पूछताछ में संयत व्यवहार रखना चाहिए। अपराधियों की फोटो पूरे शहर में बोर्ड बनाकर चस्पा करनी चाहिए ताकि सभी उनको देखें और पहचान लें।

6/12अंजलि शर्मा : लड़कियों को स्वरोजगार के लिए तमाम योजनाएं चलाने की जरूरत है। शिक्षा और सुरक्षा के साथ स्वावलंबन बढ़ाने का भी प्रयास करना चाहिए। महिलाएं स्वावलंबी होंगी तो राजनीति में आकर महिलाओं के हितों के लिए अच्छा काम कर सकेंगी।

7/12चित्रा जौहरी : घर हो या बाहर, महिलाओं के खिलाफ अपराध कम नहीं हो रहे हैं। समानता का अधिकार मिला है पर दिया नहीं गया। छेड़छाड़ करने वालों को ऐसी सजा देनी चाहिए कि वह दोबारा ऐसी गलती करने से बचें।

8/12नीतू गोस्वामी : महिला अपराधों के लिए बेहद सख्त कानून बने हैं। इनका दुरुपयोग देखने को मिलता है। लड़कियों को खुद अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलना होगा तभी वे सशक्त बन सकेंगी। लड़कियों को भी कभी गलत शिकायत नहीं करनी चाहिए।

9/12कोकिला शर्मा : महिला अपराधों का ग्राफ बढ़ा है। इसके लिए तमाम चीजें जिम्मेदार हैं और इससे निपटने के लिए बचपन से ही बच्चों को बैड टच और गुड टच की जानकारी देनी होगी। बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखना होगा। इससे वह बेहिचक बात कर सकेंगे।

10/12साक्षी भाटिया : महिला अपराध तभी रुकेंगे, जब बेटा और बेटी दोनों को परिवार से ही संस्कार मिलेंगे। बेटा-बेटी में अंतर करना गलत बात होगी। समान भाव से दोनों को देखना होगा। महिला अपराध काफी हद तक कम हो सकते हैं।

11/12प्रीति सक्सेना : लड़कियां जागरूक होंगी तो आत्मनिर्भर बनेंगी। समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं पर उनकी दशा समाज में उच्च स्तर पर नहीं है। लोगों की सोच महिलाओं के प्रति उनका अविश्वास दिखाती है। राजनीति में भागीदारी होनी चाहिए।

12/12श्रेया यादव : महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों का समाजिक बहिष्कार होना चाहिए। अपराधियों से चुनाव लड़ने का हक छीना जाना चाहिए और महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों को कानूनी व सामाजिक दोनों स्तर पर सजा दी जानी चाहिए।
