शाहजहांपुर : बेटियों को शिकायत है, सत्ता में बैठे उन लोगों से, जिन्होंने चुनाव के समय भयमुक्त वातावरण और समानता का अधिकार दिए जाने का वादा किया था। बेरोजगारी को खत्म कर रोजगार देने की बात कही थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सबसे ज्यादा सुरक्षा का मुद्दा बेटियों और महिलाओं के सामने खड़ा है। वह खुद को कहीं पर सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं। गुरुवार को शाहजह

2/8सामिया : मातृशक्ति की सुरक्षा करना सरकार की पहली प्राथमिकता होना चाहिए। देखा जाता है कि घटना होने के बाद पुलिस मौके पर पहुंचती है। आरोपी पकड़ में आ भी जाए तो उसे सजा मिलने में इतनी ज्यादा देर हो जाती है कि महिला पूरी तरह से टूट जाती है। ऐसे में उसका व्यवस्था से विश्वास उठ जाता है।

3/8अंजू रावत : जमाने की रफ्तार के साथ समाज कितना भी बदल जाए। उसकी सोच ऊंची नहीं हो सकी हैं। यह सबसे चुनौती वाली बात है। महिलाओं की स्थिति अब तक नहीं सुधर पाई है। उन्हें परिवार और सरकार के साथ की जरूरत है, जिससे उनकी सभी समस्याओं का समाधान आसानी से किया जा सके।

4/8आकांक्षा मिश्रा : सरकार को महिलाओं की सुरक्षा और शिक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। देश को आगे ले जाने की जरूरत है। महिलाओं के हालात को शिक्षा से ही बदला जा सकता है। ऐसे में शिक्षा और सुरक्षा पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाए।

5/8मानसी रोहरा : वर्तमान में आरक्षण ने मेधावी छात्राओं का गला घोंटने का काम किया है। आरक्षण की वजह से पात्र अपनी जगह पर नहीं पहुंच पा रहे हैं, जबकि अपात्र मौज काटने में लगे हैं। आरक्षण की व्यवस्था को ही सरकार को खत्म करना चाहिए।

6/8दिशा भल्ला : कोई भी सरकार हो, चुनाव आने पर रोजगार देने की बात कहती है। चुनाव के बाद नेता हसीन सपने दिखाकर चले जाते हैं। नेता ऐसा चुनें जो सरकार में महिलाओं की बात को उठा सकें। नारी की दुश्वारियों को हल करने वाले नेता चुनें।

7/8रेखा कपूर : चुनाव में बड़े स्तर पर धनराशि खर्च की जाती है, माध्यमिक, उच्च शिक्षा पर कोई खास ध्यान नहीं दिया जाता। यही वजह है कि अधिकांश बालिकाएं स्कूलों से मुंह मोड़ लेती हैं। बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का इंतजाम सरकार को करना चाहिए।

8/8शुभी गुप्ता : महिलाओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग लेना चाहिए। जिससे हर परिस्थिति से वह डटकर मुकाबला कर सकें। सरकार को इस ओर कदम उठाने चाहिए। विशेष ट्रेनिंग की व्यवस्था की जाए। फिर महिलाओं की ओर कोई आंख नहीं उठा सकेगा।
