पीलीभीत : अब हर बेटी की ख्वाहिश है कि वह शिक्षित होकर आत्मनिर्भर बने और सम्मान के साथ जिए। हर माता-पिता के मन में भी बेटी के लिए ढेरों उम्मीदें हैं। उनके मन में बेटी को पढ़ाने की चाहत है, पर मन में उनकी सुरक्षा की भी चिंता है। यह बातें गुरुवार को उपाधि डिग्री कॉलेज में आयोजित हिन्दुस्तान संवाद में बेटियों ने कही।

2/8अरीबा : महिलाओं की स्थिति पहले से बदली है पर अभी भी बहुत कुछ सुधार की जरूरत है। सुरक्षा आज भी महिलाओं की सबसे बड़ी चिंता है। अकेले कहीं आने-जाने उनके भीतर असुरक्षा का भाव क्यों रहता है यह सभी के लिए सोचने की बात है।

3/8सानियां परवीन : महिलाओं के लिए सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। उनके लिए शिक्षा की सुविधा होनी चाहिए, उन्हें नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जो भी व्यवस्था की गई हो, उसके लिए जागरूकता फैलानी की जरूरत है।

4/8प्रियंका पटेल : सरकार महिलाओं की चिंता करती है, उनके लिए कई योजनाएं चलाती है, पर इनका लाभ उन्हें मिल पा रहा है कि नहीं इसकी चिंता नहीं करती है। सरकार को चाहिए कि वह महिलाओं से जुड़ी जो भी योजनाएं हों, उनका लाभ सुनिश्चित कराए।

5/8सबे नूर : बेटियों की शिक्षा के साथ ही उनके लिए अन्य सुविधाओं की भी जरूरत है। स्कूल-कालेजों में बेटियों के खेल से जुड़ी गतिविधियों पर उताना ध्यान नहीं दिया जाता है। इससे उन्हें कमजारे होने का अहसास होता है।

6/8दीपशिखा : बेटियों के लिए जैसी सुविधाएं होनी चाहिए वैसी नहीं हैं। स्कूल-कालेज से लेकर सार्वजनिक जगहों तक पर इसकी कमी खलती है। उनके शिक्षा और सुरक्षा की बेहतर सुविधा होनी चाहिए। परिवहन सेवा में भी उन्हें परेशानी होती है।

7/8कोमल : बेटियों की बेहतरी के लिए उन्हें सरकारी सुविधाओं में आरक्षण मिलना चाहिए। यह आरक्षण उन्हें शिक्षा, रोजगार के अलावा यातायात के साधनों में भी मिलना चाहिए। बसों, ट्रेनों में महिलाओं को कहीं आने-जाने बहुत परेशानी उठानी पड़ती है।

8/8मोनिका चौरसिया : छात्राओं को सबसे पहले स्कूल आने-जाने में सुरक्षा मिलनी चाहिए। रास्ते में छेड़खानी की बड़ती घटनाओं से कई छात्राएं स्कूल आना छोड़ देती हैं। इससे उनकी पढ़ाई बाधित हो जाती है और इसका असर परीक्षा में पड़ता है। महिलाओं के साथ होने वाली घटनाओं में कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
