
पौष अमावस्या पर सुबह स्नान कर पीपल के पेड़ के नीचे जाएं। काले तिल, जौ, दूध और गंगाजल मिलाकर पितरों का तर्पण करें। 'ॐ पितृभ्यो नमः' बोलकर तीन बार जल अर्पित करें। इससे पितृ दोष शांत होता है, रुके काम बनते हैं और संतान सुख मिलता है। पितर प्रसन्न होकर कुल की रक्षा करते हैं।

2/6इस दिन काले तिल, काला कपड़ा, लोहे की वस्तु, कंबल या गुड़ का दान करें। किसी ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराएं। गरुड़ पुराण में लिखा है कि अमावस्या पर दान से पितरों का ऋण उतरता है। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, घर में बरकत आती है और अगले जन्म में सुख मिलता है।

3/6पौष अमावस्या पर पितरों का श्राद्ध करें। चावल, दूध, शहद और तिल से पिंड बनाकर 'ॐ पितृ देवताभ्यो नमः' बोलकर अर्पित करें। इसे बहते जल में या पीपल पर चढ़ाएं। मान्यता है कि पिंडदान से पितर संतुष्ट होते हैं और पितृ दोष का प्रभाव खत्म हो जाता है। घर में शांति और समृद्धि का वास होता है।

4/6शाम को पीपल के पेड़ के नीचे या घर के दक्षिण दिशा में घी का दीपक जलाएं। काले तिल का तेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं। 'ॐ यमाय नमः' बोलकर दीपदान करें। इससे पितरों को प्रकाश मिलता है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

5/6पौष अमावस्या पर ॐ पितृभ्यो नमः या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जप करें। पितरों से प्रार्थना करें - हे पितृगण, मुझे आशीर्वाद दें और दोष से मुक्त करें। इससे पितृ दोष पूरी तरह शांत होता है और जीवन में सुख-शांति आती है।

6/6पौष अमावस्या पर ये पांच कार्य करने से पितृ दोष से छुटकारा मिलता है। रुके काम बनते हैं, संतान सुख मिलता है, धन की बरकत होती है, स्वास्थ्य अच्छा रहता है और कुल की रक्षा होती है। पितर प्रसन्न होकर अगले जन्म में भी सुख देते हैं। यह दिन पितरों को प्रसन्न करने का सबसे बड़ा अवसर है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
