DA Image

अगली स्टोरी

#समलैंगिकता

उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने गुरूवार को एकमत से 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के उस हिस्से को निरस्त कर दिया जिसके तहत परस्पर सहमति से अप्राकृतिक यौन संबंध अपराध था। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने अप्राकृतिक यौन संबंधों को अपराध के दायरे में रखने वाली धारा 377 के हिस्से को तर्कहीन, सरासर मनमाना और बचाव नहीं किये जाने वाला करार दिया।

अन्य खबरें

  • 1
  • of
  • 9

जब भाइयों ने अपने पिता का नाम अलग-अलग लिखा

पप्पू और फेकू दोनों भाई एक ही क्लास में पढ़ते थे।

टीचरः तुम दोनों ने अपने पापा का नाम अलग-अलग क्यों लिखा।

पप्पूः मैडम, फिर आप कहोगी कि नकल मारी है, इसलिए...