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13 नबम्बर, 2019|12:57|IST

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भारतीय परंपरा में विवाह का पवित्र रिश्ता सात जन्मों का अटूट बंधन माना जाता है। विवाह मंडप में सात फेरे लेने के बाद पति-पत्नी शादी के अटूट बंधन में बंध जाते हैं। शादी के दौरान जब वर वधू सात फेरे लेते हैं तो हर फेरे के साथ एक वचन जुड़ा होता है। वचन स्वीकारने के बाद ही कन्या का हाथ वर के हाथों में सौंपा जाता है। अग्नि को साक्षी मानकर वर-वधू जीवनभर एक दूसरे का हर सुख-दुख में साथ निभाने का वचन देते हैं। लेकिन अगर असल जीवन की बात की जाएं तो क्या पति पत्नी के बीच ये सात फेरे काफी है? आज के चुनौती भरे दौर में वो सात फेरे कितने सार्थक साबित हो रहे हैं? अब बात बराबरी की होनी चाहिए। सवाल यह है कि जव वक्त बदला है तो रिवाज क्यों नहीं। इस करवाचौथ हिन्दुस्तान अपनी खास मुहिम के जरिए आपका ध्यान हर मोर्चे पर महिलाओं के आगे बढ़ने का रास्ता रोके जाने की प्रवृत्ति पर दिलाना चाहता है। पढ़ाई, शौक, नौकरी, घर-परिवार की जिम्मेदारी, सम्पत्ति में हिस्सा जैसे मामलों में उसे पीछे रखा जाता है। क्या सात फेरे लेने के बाद उसकी आकांक्षाओं और इच्छाओं पर ताला लगा देना सही है? इस खास मुहिम में अपनी भागीदारी निभाने के लिए जुड़े रहें livehindustan.com से

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