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ओडिशा: 5 हजार रुपये का कर्ज चुकाने के लिए पिता ने अपनी ढाई साल की बेटी को बेच डाला

लाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीPublished By: Nootan Vaindel
Mon, 14 Jun 2021 01:43 PM
ओडिशा: 5 हजार रुपये का कर्ज चुकाने के लिए पिता ने अपनी ढाई साल की बेटी को बेच डाला

ओडिशा के जजपुर में एक पिता ने अपना कर्ज चुकाने के लिए अपनी ढाई साल की लड़की को बेच दिया। इस घटना का पता तब चला जब लड़की के दादा रवींद्र बारिक ने अपने बेटे रमेश और एक दूसरे आरोपी लिटू जेना के खिलाफ FIR दर्ज कराई, जिस ने लड़की को पैसे के बदले में खरीदा था। कथित तौर पर, आरोपी पिता रमेश कुमार बारिक ने बिंझारपुर थाना क्षेत्र में आने वाले सहदेवपुर गांव के एक लिटू जेना से 5,000 रुपये उधार लिए थे। रमेश आर्थिक तंगी से गुजर रहा था, इसलिए वह अपना कर्ज नहीं चुकाया पाया था।

लिटू अपने कर्ज लेने के लिए अक्सर रमेश के घर जाता था, जिसके बाद रमेश ने कर्ज चुकाने के लिए अपनी छोटी-सी बेटी को उसे सौंप दिया। एडिशनल डीजी यशवंत जेठवा ने बताया, "यह सच है कि बच्ची के पिता रमेश ने आरोपी से 3 से 5 हजार रुपये का कर्ज लिया था. रमेश की पत्नी उसे छोड़ कर जा चुकी थी. उसने अपने ससुर से कहा कि वह अकेले अपनी बच्ची की देखभाल करने में सक्षम नहीं है. दूसरे आरोपी लिटू अपने परिवार के साथ रहता था इसलिए रमेश ने अपनी बेटी उसे सौंप दी. वह डील परमानेंट नहीं थी"

जिला बाल संरक्षण अधिकारी निरंजन कर ने कहा, "हमने बच्चे को बचा लिया है; हम यह पता लगा रहे हैं कि बच्चे को सुरक्षित स्थान पर कैसे रखा जाए और उसे समय पर बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया जाए।"

"पुलिस इस बात का पता लगाने के लिए मामले की जांच कर रही है कि किस परिस्थिति में बच्चे को उसके माता-पिता ने किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया था। फिलहाल, बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए, हम उसे बाल कल्याण समिति को सौंप देंगे। हम यह जांच करेंगे कि क्या बच्चा अवैध रूप से बेचा गया था या आरोपी उनका रिश्तेदार है।"

शिकायतकर्ता रवींद्र बारिक (नाबालिग के दादा) ने कहा, "मैंने अपने बेटे रमेश बारिक के खिलाफ FIR दर्ज की थी जब उसने अपनी बेटी को बिंझारपुर में किसी लिटू जेना को बेच दिया था। मैं मामले के बारे में पूछताछ करने के लिए दो बार पुलिस स्टेशन गया था। अब मुझे पता चला कि पुलिस ने मेरी पोती को उस व्यक्ति से छुड़ा लिया है और वे उसे जल्द ही मुझे सौंप देंगे।"

रमेश और उसकी पत्नी भुवनेश्वर में काम करते थे। रमेश शराबी था और अपनी पत्नी के साथ झगड़ा करता था, जिसके बाद वह उसे छोड़कर अपने माता-पिता के घर चली गई, उसने बच्ची को रमेश के पास छोड़ दिया। लॉकडाउन होने के बाद मरेश भी अपने गांव बिंझापुर आ गया था और लवहीं अपनी बेटी के साथ रह रहा था.
घटना के दिन रमेश नशे में था, जब लिटू जेना ने उसे चुकाने के लिए कहा तो उसने कर्ज चुकाने के लिए अपनी बेटी को दे दिया।

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