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अमीर बनकर जीना काफी मुश्किल

चीन के हांगझू इलाके में पैदा जैक मा का बचपन काफी मुश्किलों से भरा हुआ था। परिवार में उनके अलावा एक छोटी बहन और बड़ा भाई था। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार ने उन्हें सीमित साधनों में जीना सिखाया। जैक शुरू से पढ़ाई में फिसड्डी रहे। गणित और विज्ञान तो उन्हें कभी समझ में ही नहीं आया। पर 13 साल की उम्र में उनके मन में एक बात बैठ गई कि यदि वह अंग्रेजी सीख लें, तो उनका कल्याण हो जाएगा। पर अंग्रेजी सिखाने वाला कोई नहीं था। फिर उन्होंने एक तरकीब निकाली। वह रोजाना अपने शहर के मशहूर होटल के सामने सुबह पांच बजे पहुंच जाते। इस होटल में अक्सर विदेशी पर्यटक आते थे। जैक ने सोचा कि अगर वह विदेशी पर्यटकों के संग समय बिताएंगे, तो अंग्रेजी सीख जाएंगे। गाइड के तौर पर वह विदेशियों को शहर घुमाते और उनसे अंग्रेजी में ही बात करने की कोशिश करते। कुछ दिनों में वह विदेशी स्टाइल में अंग्रेजी बोलने लगे। सबसे बढ़िया बात यह थी कि इस काम से उन्हें पॉकेट मनी भी मिल जाती थी। इसके अलावा पर्यटकों से पश्चिमी देशों के तौर-तरीके सीखने में भी मदद मिली।

स्कूल के दिनों में सहपाठियों के संग उनका अंदाज आक्रामक रहता था। जैक कहते हैं, स्कूल में मैं अपने विरोधियों से कभी नहीं डरा। यहां तक कि जो लड़के मुझसे कद-काठी में बहुत बड़े होते,  मैं उनसे भी झगड़ा कर लेता था। कॉलेज की प्रवेश परीक्षा में वह दो बार फेल हुए। तीसरी कोशिश में उन्हें हांगझू टीचर्स इंस्टीट्यूट में दाखिला मिल गया। 1988 में उन्होंने स्नातक किया। इसके बाद नौकरी की तलाश शुरू हुई। बारह जगह उनके आवेदन खारिज हो गए। बड़ी मुश्किल से एक स्कूल में अंग्रेजी टीचर की नौकरी मिली। बच्चों के संग उनका अच्छा तालमेल रहा, मगर दिल में कुछ और करने की ख्वाहिश मचल रही थी, लिहाजा ज्यादा दिन नौकरी नहीं कर पाए।  फिर उन्होंने अनुवाद की कंपनी बनाई। 1994 में वह अपने बिजनेस के सिलसिले में अमेरिका गए। वहां पहली बार उन्हें इंटरनेट के बारे में पता। इंटरनेट की दुनिया उन्हें  करामाती लगी। अमेरिकी घर बैठकर इंटरनेट के जरिये एक-दूसरे से संपर्क कर रहे थे।

यही नहीं, शॉपिंग से लेकर पढ़ाई तक, सब कुछ इंटरनेट पर हो रहा था। जैक के लिए यह अजूबा था। जाहिर है, उस दिनों चीन में इंटरनेट को लेकर उतनी जागरूकता नहीं थी। जैक एक मजबूत इरादे के साथ चीन लौटे। उन्होंने 'चाइना पेज' लांच किया। यह चीन की पहली ऑनलाइन डायरेक्टरी थी। इसकी खूब चर्चा हुई। इस कामयाबी के बाद जैक चीन में 'मिस्टर इंटरनेट' के नाम से मशहूर हो गए। पर मुश्किलें अभी बाकी थीं। उन दिनों बहुत कम घरों में कंप्यूटर हुआ करते थे। ऐसे में, चाइना पेज को लोगों तक पहुंचाना संभव नहीं हो पाया। अंतत: चाइना पेज को बंद करना पड़ा।
बहुत निराशा हुई। जीवन चलाने के लिए वह वाणिज्य मंत्रालय में नौकरी करने लगे। पर मन नहीं लगा। कुछ दिनों बाद उन्होंने फिर हिम्मत दिखाई। अपने घर पर 17 दोस्तों को बुलाया। उनके सामने ऑनलाइन खरीदारी के लिए एक कंपनी बनाने का आइडिया पेश किया। आइडिया गजब का था। दोस्तों को पसंद आया। वे कंपनी में पैसा लगाने को राजी हो गए। कंपनी का नाम रखा गया अलीबाबा। एक छोटे-से कमरे में अलीबाबा कंपनी की शुरुआत हुई।

चीन में ऑनलाइन खरीदारी का आइडिया एकदम नया था। जैक ने अपनी वेबसाइट के जरिये कंपनियों के सामान को उपभोक्ताओं के सामने पेश किया। उन्होंने इस बात का विशेष ख्याल रखा कि लोग सुरक्षित और सस्ती ऑनलाइन खरीदारी कर सकें। शुरुआत शानदार रही। फिर कारोबार को बढ़ाने के लिए निवेश की जरूरत पड़ी। जैक जापानी सॉफ्टवेयर कंपनी सॉफ्ट बैंक से कर्ज हासिल करने में कामयाब रहे। अलीबाबा कंपनी में पैसा लगाने वाले एक निवेशक वू यिंग कहते हैं, एक पुरानी-सी जैकेट और हाथ में कागज पकड़े जैक हमारे पास आया। कुल छह मिनट में उसने निवेशकों को इतना यकीन दिला दिया कि उन्हें दो करोड़ डॉलर का कर्ज मिल गया।

लोगों का भरोसा जीतने के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी सरकार को भरोसे में लेना। जैक ने चीनी नेताओं को यकीन दिलाया कि उनकी कंपनी किसी भी तरह पार्टी या सरकार के खिलाफ नहीं है। कंपनी का कारोबार बढ़ने लगा। दिलचस्प बात यह थी कि उन्होंने कभी प्रबंधन की पढ़ाई नहीं की, न ही किसी तरह की बिजनेस ट्रेनिंग ली। पर अपनी कंपनी का प्रबंधन उन्होंने बखूबी किया। जैक कहते हैं, मैं गणित में अच्छा नहीं हूं। मैंने मैनेजमेंट की पढ़ाई नहीं की। मुझे अकाउंट्स की रिपोर्ट जरा भी समझ नहीं आती। पर कंपनी चलाना सीख गया। देखते-देखते वह एशिया के दूसरे सबसे अमीर बिजनेसमैन बन गए। चीन की सोशल नेटवर्किंग साइट वीबो पर उनके 1.5 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर हैं। आज अलीबाबा दुनिया के ई-कॉमर्स बाजार की बड़ी कंपनियों में शुमार होती है। चीन के सबसे अमीर शख्स चुने जाने पर जैक ने कहा, अमीर बनकर जीना आसान नहीं होता। जब आप अमीर होते हैं, तो लोग आपके साथ सिर्फ पैसे के लिए जुड़ते हैं। यह ठीक नहीं है।
प्रस्तुति:  मीना त्रिवेदी

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