DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

चीन में सू की

जहां तक हम जानते हैं, जनमत सर्वेक्षकों के लिए यह जानना अभी शेष है कि क्या आज के लोग पहले की तुलना में अधिक प्रतिबद्ध हैं? जब चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी गर्मजोशी से लोकतंत्र की सबसे बड़ी हिमायती आंग सान सू की अगवानी कर रही है, तब इस सर्वे को रोका नहीं जा सकता। 1991 में आंग सान सू की को म्यांमार (बर्मा) में तानाशाही व्यवस्था को अहिंसक तरीके से चुनौती देने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनका वही स्थान है, जो लू श्याबाओ का है। चीनी लेखक लू श्याबाओ आज भी जेल में बंद हैं। साल 2010 में उन्हें लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए नोबेल सम्मान मिला और चीन ने पुरस्कार समारोह में उनके उपस्थित होने पर प्रतिबंध लगा दिया था। बहरहाल, आंग सान सू की पांच दिन की बीजिंग यात्रा पर गई हैं। इसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भेंटवार्ता भी शामिल है। यह मुलाकात एक एक ऐसी दुनिया की तरफ प्रगति के द्वार खोल सकती है, जिसमें खुली बहस व अभिव्यक्ति की आजादी भरपूर सराही जाती हो।

सू की का दौरा उस संभावना की ओर संकेत है, जिसमें लगता है कि चीन तमाम विचारधाराओं की विदेशी राजनीतिक हस्तियों से संबंध बनाना चाहता है, न कि सिर्फ सत्तासीनों से। वैसे भी, एशियाई समुद्र में उसकी आक्रामकता को देखते हुए चीन को इस क्षेत्र में दोस्त की तलाश है। आंग सान सू की म्यांमार में विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा हैं। यह देश चीन से सटा हुआ है। उनकी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) नवंबर में होने वाले चुनाव में बहुमत पा सकती है। इससे इस दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश में लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी, जो लंबे समय तक फौज के अधीन रहा है। सच न तो तुलनात्मक होती है, न ही यह किसी खास व्यक्ति के अधीन होता है। बल्कि यह तो सब जगह मौजूद है और हर कोई इसे बोलने में सक्षम है। हालांकि, इस तक पहुंचने के लिए किसी से तर्क-वितर्क संभव है। जब स्वतंत्रता के बड़े पैरोकारों (सू की जैसा) का चीन में लंबी चर्चा के लिए स्वागत किया जा रहा है, तब यह साफ संकेत है कि पहले के मुकाबले चीन आज औचित्यपूर्ण सोच की ओर बढ़ सकता है।  
द क्रिश्चियन साइंस मॉनिटर, अमेरिका

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:चीन में सू की