DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बदावी को बख्श दें

रविवार को सऊदी अरब की शीर्ष अदालत ने ब्लॉगर रैफ बदावी की जिद्दा में क्रिमिनल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है, जो आजाद अभिव्यक्ति के 'अपराध' के लिए मृत्युदंड के समान है। क्रिमिनल कोर्ट ने बदावी को हजार कोड़े मारने की सजा सुनाई थी। 20 हफ्तों तक हफ्तेवार 50 कोड़े सार्वजनिक तौर पर जोर से मारने का आदेश हुआ था। इसके अलावा, बदावी को दस साल जेल में काटने और दस लाख रियाल, यानी 2,67,000 डॉलर जुर्माना चुकाने होंगे। क्रिमिनल कोर्ट के इस आदेश की दुनिया भर में आलोचना हुई, उसके बाद शीर्ष अदालत का यह फैसला आया। अब सऊदी अदालत में आगे कोई अपील संभव नहीं। बदावी की उम्मीद इसी में छिपी है कि बादशाह सलमान बिन अब्दुल अजीज उन्हें माफी दे दें।

साल 2008 में बदावी ने एक वेबसाइट बनाई थी- फ्री सऊदी लिबरल्स। यह वेबसाइट सऊदी अरब के मजहबी रुझानों के विरोध का केंद्र बनी। साल 2012 में वह गिरफ्तार कर लिए गए और उन पर साइबर अपराध के आरोप तय हुए। शुरू में उन्हें 600 कोड़े मारने और सात साल जेल की सजा सुनाई गई। लेकिन मई में उनकी सजा और बढ़ा दी गई। सऊदी अरब के युवाओं के बीच सोशल मीडिया तेजी से लोकप्रिय हुआ है। यह उस समाज में मुक्त विचारों का एक दुर्लभ द्वार है, जहां तमाम तरह के प्रतिबंध व्याप्त हैं। यह साफ लगता है कि सऊदी अरब की न्यायपालिका बदावी के जरिये एक उदाहरण पेश करने का इरादा रखती है। जनवरी में बदावी को 50 कोड़े मारे गए। वह इस कदर जख्मी हुए कि डॉक्टरों के एक दल ने कहा कि वह अगले हफ्ते की सजा पाने की स्थिति में नहीं हैं। तब से बदावी को कोड़े नहीं मारे गए, लेकिन असली डर यह है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि सजा की तामील जल्द से जल्द है। ऐसे में, बदावी की जिंदगी खतरे में है। मौत या मौत के समान जिंदगी, इसी दो में से कोई एक सच उनके सामने है और यह सच सऊदी व्यवस्था के लिए एक कलंक की तरह ही होगा। अमेरिका ने इस सजा को अमानवीय बताया है।  
द न्यूयॉर्क टाइम्स, अमेरिका

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बदावी को बख्श दें