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पहली महिला राष्ट्र प्रमुख

जब पिछले साल के आखिर में लेपेप गठबंधन सत्ता में आया, तब कैलाश पुरयाग मॉरीशस गणराज्य के राष्ट्रपति हुआ करते थे। जुलाई, 2012 में नेशनल असेंबली द्वारा वह इस पद के लिए तब चुने गए, जब अनिरुद्ध जगन्नाथ ने मॉरीशस मिलिटेंट मूवमेंट के साथ मिलकर अगला चुनाव लड़ने का फैसला किया और राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था। अनिरुद्ध जगन्नाथ को लेबर पार्टी के बहुमत के कारण राष्ट्रपति आवास में जाने का मौका मिला था। बहरहाल, चुनाव में जाने के दौरान लेपेप गठबंधन ने यह घोषणा की थी कि अगर वह सत्ता में आता है, तो पूर्व अकादमिक हस्ती और वैज्ञानिक अमीना गुरीब फकिम देश की नई राष्ट्रपति बनेंगी। इसमें संदेह नहीं कि इसका उद्देश्य एक खास तबके का वोट लेना था। बहरहाल, आम धारणा यह बनी कि गुरीब फकिम का रास्ता साफ करने के लिए कैलाश पुरयाग जल्द ही हट जाएंगे।

हालांकि, जब नई सरकार आई, तब जब कैलाश पुरयाग से पूछा गया, तो उन्होंने साफ-साफ शब्दों में कहा कि उनका कार्यकाल 2017 में समाप्त होने जा रहा है। दूसरे शब्दों में, ऐसा लगा कि वह गुरीब फकिम के लिए कुरसी नहीं छोडेंगे। लेकिन एक जून को अचानक ही यह खबर फैल गई कि कैलाश पुरयाग राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहे हैं। इसके बाद यह घोषणा हुई कि नेशनल असेंबली में चुनाव के जरिये फैसला लिया जाएगा कि किसे स्टेट हाउस में भेजा जाए। पांच जून को यह बताया गया कि 56 साल की गुरीब फकिम देश की अगली राष्ट्रपति होंगी। यह भी साफ किया गया कि इस साल जनवरी में ही अनिरुद्ध जगन्नाथ और कैलाश पुरयाग के बीच यह सहमति बन चुकी थी कि कैलाश मई के आखिर में पद से इस्तीफा दे देंगे। हालांकि, यह कारण नहीं बताया गया कि इन दोनों महानुभावों ने इस समय को ही क्यों चुना? लेकिन, कुछ लोग इसे यों देख रहे हैं कि ताजा विवाद से लोगों का ध्यान हटाने और एक तबके का दिल जीतने के लिए यह कदम उठाया गया है। और इस तरह, गुरीब फकिम मॉरीशस की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं। निस्संदेह, यह मॉरीशसवासियों के लिए गर्व का क्षण है।  
मॉरिशस टाइम्स, मॉरिशस

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