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विरोधी खबरों का दमन

सोमवार रात यांग्तेज नदी में एक जहाज के डूबने की दर्दनाक घटना चीन के साम्यवादी शासन की सेंसरशिप सामने लाती है। हादसे के कुछ घंटों के अंदर, जिसमें 440 से अधिक लोग मर गए या लापता हैं, अधिकारी इंटरनेट से उन सवालों और बयानों को हटाने लगे, जो ईस्टर्न स्टार और उस पर सवार यात्रियों से जुड़े थे। न्यू मीडिया को यह आदेश दिया गया कि वह पत्रकारों को घटनास्थल के पास न भेजे, सिर्फ और सिर्फ सरकारी सूचनाओं और टेलीविजन की खबरों पर भरोसा करे। विस्तृत जानकारी देने की बजाय उनकी खबरों में प्रधानमंत्री ली केकियांग ही छाए रहे, जो राहत और बचाव कामों में मुस्तैद दिखाई पड़ रहे थे। इससे याद आते हैं वे पुराने हादसे, जिनमें चीन के ऐसा ही रवैया था। 2003 सार्स महामारी से लेकर 2008 सिचुआन भूकंप और 2011 की हाई-स्पीड ट्रेन दुर्घटना तक, यही सब होता आया है। अलबत्ता, पुराने हादसों से यह हादसा इस मायने में अलग हो जाता है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग का शासन निष्पक्ष रिपोर्टिंग को दबाने में अपने पूर्ववर्तियों से भी आगे निकल गया। देखा जाए, तो भूकंप के बाद स्थानीय और विदेशी पत्रकारों को कई हफ्तों तक अपेक्षाकृत निष्पक्ष और आजाद रिपोर्टिंग की छूट थी।

जब कुछ पत्रकारों ने उस स्कूल के जर्जर निर्माण पर रिपोर्टिंग शुरू की, जिसमें दबकर हजारों बच्चे मरे थे, तब जाकर मीडिया पर पाबंदी लगी। रेल हादसा सोशल मीडिया में छाया रहा था। इसने आग में घी का काम किया और कई रेल अधिकारियों की बर्खास्तगी मुमकिन हो पाई। लेकिन इस बार तो हद हो गई। ऐसा लगता है कि शी जिनपिंग इस घटना में निष्पक्ष और स्वतंत्र रिपोर्टिंग व टिप्पणी का गला दबाकर जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ना चाहते हैं। विदेशी पत्रकार बता रहे हैं कि जहां जहाज डूबा, उसके एक मील दूर से ही सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं। वैसे, जहां विदेशी पत्रकारों के एक समूह को सरकार खुद घटनास्थल तक ले गई, वहीं जो निष्पक्ष व स्वतंत्र रिपोर्टिंग की इच्छा पाले थे, उन्हें घटनास्थल के आसपास भी फटकने नहीं दिया गया। यहां तक कि लापता लोगों के परिजनों को भी गुमराह किया जा रहा है।
द वाशिंगटन पोस्ट, अमेरिका

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