अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पनामा पेपर्स

जनता के मन में जो संदेह रहा है, पनामा की लॉ फर्म मोसेक फोंसेका के दस्तावेजों से उसकी फिर से पुष्टि होती है। नवाज शरीफ, बेनजीर भुट्टो, रहमान मलिक, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और डेविड कैमरन के पिता उन चंद बड़े नामों में शामिल हैं, जिन्होंने अपने गलत काम के लिए ऑफशोर कंपनियां (विभिन्न वित्तीय, कानूनी और कर-लाभ के लिए विदेशों में खोली जाने वाली कंपनी) खोलीं।

जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें से कई अपनी जनता के साथ विश्वासघात के दोषी माने जा सकते हैं, जबकि कई कर-चोरी, रिश्वतखोरी और बाजार को प्रभावित करने जैसे गुनाहों के। दुनिया भर के राजनेता और उद्योगपति अपने बचाव में यही राग अलाप रहे हैं कि उन्होंने कुछ भी गैर-कानूनी नहीं किया। मगर रहमान मलिक का बयान अलग है। वह इस पूरे विवाद का ठीकरा रॉ पर फोड़ रहे हैं। यह बहाना गुनाह को कुबूल करने से कम नहीं, क्योंकि रहमान भले ही सीनेटर हैं, मगर उनकी इस बदनामी से भारत या उसकी खुफिया एजेंसी को कोई फायदा नहीं होने वाला।

बेशक टैक्स चोरी और टैक्स देने से बचने की कवायद, दो अलग चीजें हैं, मगर जब इसे सही व गलत के खांचे में फिट करना हो, तब बाद वाली स्थिति को भी सही नहीं कहा जा सकता। यहां मुद्दा कानूनी नहीं, नैतिकता का है। वास्तव में, इन रसूखदारों के पास अब भी कई ऐसे रास्ते हैं, जिनसे रकम बिना किसी परेशानी के चुपचाप जमा की जा सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इससे जुड़े कई कानून उन्हीं लोगों द्वारा बनाए गए हैं, जिनके नाम इस पनामा पेपर लीक में सामने आए हैं। अगर कोई फर्म कारोबारी राज की सुरक्षा चाहती है, तो शेल कंपनी बहुत ही उपयोगी मानी जाती है। मगर इनका इस्तेमाल टैक्स-चोरी से लेकर आतंकवाद को फंड देने तक में होता है। बेशक शरीफ परिवार पर किसी कंपनी के कानूनी दुरुपयोग का आरोप नहीं है। मगर क्या यह आरोप बेबुनियाद है कि ऑफशोर कंपनी खोलने के पीछे मंशा अपनी पूंजी छिपाना ही है? अपनी संपत्ति को लेकर देश की जनता को अंधेरे में रखना रहनुमाओं के लिए जायज नहीं है, और यह उस पद का भी अपमान है, जिन पर वह अभी हैं।   
द नेशन, पाकिस्तान

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:panama law firm documents leak