DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

उत्तर कोरिया का दुस्साहस

इस साल की शुरुआत में परमाणु परीक्षण करने के बाद उत्तर कोरिया ने एक और परमाणु हथियार का परीक्षण किया है। अब उसने सैटेलाइट रॉकेट का परीक्षण किया है। इन दोनों परीक्षणों से यह साफ हो गया है कि अन्य देशों के खिलाफ परमाणु हथियार के इस्तेमाल की क्षमता उसने हासिल कर ली है। इन परीक्षणों ने एक बार फिर इस दुर्भाग्यपूर्ण सच की याद दिलाई है कि दुनिया उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को रोकने में नाकाम रही है। खासकर चीन की नपुंसकता इससे उजागर हुई है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग उत्तर कोरिया से लगातार यह अपील करते रहे कि वह संयम का परिचय दे। इसके साथ ही वह उसके खिलाफ प्रस्तावित कठोर अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों का समर्थन करने से इनकार करते रहे, जो शायद उसके नेता किम जोंग-उन पर असर डाल पातीं। बीजिंग अब संयुक्त राष्ट्र द्वारा तैयार नए प्रतिबंधों पर साथ देने के लिए सहमत हुआ है, लेकिन इस बात के कोई संकेत नहीं हैं कि ये प्रतिबंध दूर तलक जाएंगे।

चीनियों का यह कहना शायद सही हो कि किम जोंग-उन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है, लेकिन चूंकि उत्तर कोरिया का एकमात्र सहयोगी और खाद्यान्न व तेल के मामलों में उसकी जीवन रेखा चीन ही है, सो किसी भी अन्य देश के मुकाबले वह अधिक मजबूत हालत में है कि किम जोंग-उन को सही रास्ते पर ला सके। वह किम पर इस बात के लिए दबाव बना सकता है कि उत्तर कोरिया अपने भड़काऊ कदम बढ़ाने से पहले दो बार सोच ले। बहरहाल, जहां चीन का रवैया टालू है, वहीं दूसरे देश सक्रिय दिख रहे हैं। पिछले हफ्ते अमेरिकी कांग्रेस ने एक स्वर से उसके विरुद्ध सख्त प्रतिबंधों का अनुमोदन कर दिया, ताकि वह हथियारों व मिसाइलों के लिए धन न आवंटित कर सके। राष्ट्रपति ओबामा को इस विधेयक पर दस्तखत करना चाहिए, ताकि यह कानूनी रूप ले सके। लेकिन सिर्फ कठोर प्रतिबंध ही उत्तर कोरिया को इस बात के लिए बाध्य नहीं करेगा कि वह अपने परमाणु कार्यक्रमों पर फिर से सोचे। निस्संदेह, यह एक भयानक चुनौती है, लेकिन इसे नजर अंदाज करना इस आशंका को मजबूत ही करेगा कि यह खतरा कहीं बदतर शक्ल ले सकता है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स, अमेरिका

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:north korea audacity