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हांगकांग की आजादी

बीजिंग में हुई बैठक में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी ल्युंग चुन-यींग और उनकी सरकार की इस बात के लिए तारीफ की कि राष्ट्रीय संप्रभुता और ‘एक देश-दो व्यवस्था’ के बुनियादी सिद्धांत की रक्षा के लिए उन्होंने उम्दा प्रयास किए हैं। जाहिर है, हांगकांग की आजादी मांगने वालों के लिए यह एक और साफ संकेत है कि सरकार उनके खिलाफ हरसंभव सख्त रवैया बनाए रखेगी और सुरक्षा बलों को कतई ढील नहीं देगी। ल्युंग का कार्यकाल अगले वर्ष एक जुलाई को खत्म हो रहा है, और बतौर मुख्य कार्यकारी बीजिंग का यह उनका संभवत: आखिरी दौरा था। निश्चिय ही राष्ट्रपति शी की यह तारीफ अगले मुख्य कार्यकारी को ल्युंग के नक्शे-कदम पर चलने के लिए प्रेरित करेगी और वह भी अलगाववाद को लेकर खासतौर पर चौंकन्ने रहेंगे। दरअसल, 2014 में हुए गैर-कानूनी ‘ऑक्युपाई सेंट्रल’ आंदोलन के बाद से हांगकांग की सरकार को अलगाववादियों से बार-बार चुनौती मिलने लगी है। हाल ही में पिछले महीने, कुछ चुने सांसदों ने भी बेसिक लॉ के अनुच्छेद 104 और शपथ व घोषणा-पत्र से जुड़े अध्यादेश की धारा-21 का उल्लंघन किया। हालांकि उनमें से दो सांसदों को, जिनका नाम ल्युंग चुंग-हेंग और यू वाई-चिंग है, हाईकोर्ट ने बतौर संसद सदस्य अयोग्य घोषित कर दिया है। मगर आलम यह है कि अब तक इन बागी सांसदों ने किसी तरह का कोई पछतावा तो नहीं ही जताया, वे मुकदमा लड़ने के लिए चंदा बटोरने लगे हैं। यह बताता है कि आने वाले दिनों में अलगाववादियों के खिलाफ लड़ाई आक्रामक होने वाली है। चूंकि जो लोग ‘आजादी’ की मांग कर रहे हैं, वे विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता को जोखिम में डालने के साथ ही राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा को भी खतरे में डाल रहे हैं, इसलिए यहां के नीति-नियंताओं को ‘हांगकांग की आजादी’ को कानून के अनुसार बनाए रखना चाहिए। हांगकांग के बाशिंदों के इच्छा के सम्मान का भी यही एकमात्र तरीका है और इसी से विशेष प्रशासनिक क्षेत्र और देश, दोनों के हितों की रक्षा हो सकती है।

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  • Web Title: hong kongs freedom