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विदेशी मीडियारोटी और कपड़े की बर्बादी

लाइव हिन्दुस्तान टीम
Sun, 14 Aug 2016 08:56 PM
रोटी और कपड़े की बर्बादी

अमेरिकी आजकल काफी ज्यादा मात्रा में पौष्टिक खाना फेंक देते हैं। वे इस्तेमाल लायक कपड़े भी हद से ज्यादा बर्बाद करते हैं। रोटी और कपड़ा इंसान की बुनियादी जरूरतें हैं, और इनके उत्पादन में बड़ी मात्रा में पानी, केमिकल और ईंधन की खपत होती है। लिहाजा इनके बड़े हिस्से को यूं ही फेंक देना बहुमूल्य संसाधनों को बर्बाद करना है।

कृषि मंत्रालय का अनुमान है कि अमेरिका में उपजाए जाने वाले 30 से 40 फीसदी खाद्यान्न का उपभोग नहीं किया जाता। इसी तरह, अमेरिकी हर वर्ष 1.28 करोड़ टन कपडे़ बर्बाद कर देते हैं। इसे देखते हुए संघ सरकार ने भोजन की बर्बादी को 2030 तक आधा करने का वादा किया है। कई रेस्तरां इस पर गंभीरता से सोचने भी लगे हैं कि आखिर वे कैसे खाने की बर्बादी रोक सकते हैं। अनुमान है कि किफायत बरतने से इस उद्योग को 1.6 अरब डॉलर से ज्यादा की बचत होगी। कुछ प्रयास तो शुरू भी हो चुके हैं। मसलन, कुछ होटल व रेस्तरां अब बचे हुए खाने को घर ले जाने के लिए छोटे डिब्बे देने लगे हैं, क्योंकि उन्होंने पाया है कि बड़े डिब्बों की वजह से लोग खाना घर लेने जाने की बजाय छोड़ देना ज्यादा मुनासिब समझते हैं। वहीं, ब्रिटेन की एक स्टार्ट-अप कंपनी ने ‘टू गुड टु गो’ नाम से एप तैयार किया है, जिसके सहारे रेस्तरां या बेकरी वाले अपने यहां बचे खाने पर ग्राहकों को खास छूट देने संबंधी विज्ञापन देते हैं। इसी तरह, कपड़ा विक्रेताओं ने भी पहने हुए कपड़े वापस लेना शुरू किया है।

अंतरराष्ट्रीय कंपनी ‘एचऐंडएम’ का कहना है कि पिछले वर्ष उसने 12,000 टन इस्तेमाल किया हुआ कपड़ा वापस लिया है। सेकेंड-हैंड कपड़े कई दुकानों और गुडविल इंडस्ट्रीज जैसे गैर-लाभकारी समूहों द्वारा बेचे जाने लगे हैं। असल में, नए कपड़ों के उत्पादन में लगभग 200 टन पानी की खपत होती है और कपास के उत्पादन में दुनिया भर में 24 फीसदी कीटनाशक व 11 फीसदी अन्य रसायनों का इस्तेमाल होता है। जाहिर है, ‘कम इस्तेमाल, दोबारा इस्तेमाल और फिर से इस्तेमाल लायक बनाने’ की सोच हमें अपनानी होगी। इससे इंसान अपने तन को ढकने और पेट भरने का स्थायी तरीका खोज सकेगा।   
द क्रिश्चियन साइंस मॉनिटर, अमेरिका

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