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दूसरे देश श्रीलंका पर हुक्म नहीं चलाएं: राजपक्षे

मानवाधिकार के उल्लंघन के आरोपों के मामले में अपने रुख पर अडिग श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग को खारिज करते हुए कहा है कि दूसरे देशों को श्रीलंका पर हुक्म नहीं...

दूसरे देश श्रीलंका पर हुक्म नहीं चलाएं: राजपक्षे
एजेंसीSun, 17 Nov 2013 05:57 PM
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मानवाधिकार के उल्लंघन के आरोपों के मामले में अपने रुख पर अडिग श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग को खारिज करते हुए कहा है कि दूसरे देशों को श्रीलंका पर हुक्म नहीं चलाना चाहिए। ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन द्वारा मानवाधिकार के उल्लंघन के मामलों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच को अल्टीमेटम दिए जाने के एक दिन बाद राजपक्षे ने रविवार को कहा कि श्रीलंका को सुलह के लिए समय की जरूरत है और इसको लेकर समयसीमा नहीं निर्धारित की जा सकती।

उन्होंने राष्ट्रामंडल राष्ट्राध्यक्षों की शिखर बैठक (चोगम) के समापन से इतर कहा कि हमारे यहां कानूनी व्यवस्था और संविधान है। हमारे यहां प्रक्रिया है जो शुरू की जा चुकी है। इसमें समय लगेगा। हमें न सिर्फ उत्तर बल्कि दक्षिण श्रीलंका के लोगों की सोच में बदलाव करना होगा।

राजपक्षे ने कहा कि 30 वर्षों तक संघर्ष चला है। न सिर्फ तमिल, सिंहली और मुस्लिम को पीड़ा झेलनी पड़ी है। उनकी देखभाल करना मेरी जिम्मेदारी है। परंतु आप यह नहीं कह सकते कि यह एक सप्ताह या तीन अथवा चार सप्ताह में करना है। उन्होंने कहा कि आपको हमारे विचारों का सम्मान करना होगा। हमारे साथ निष्पक्ष रहिए। किसी को हुक्म नहीं चलाना चाहिए। आपको समुदायों को बांटने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना कर रहे राजपक्षे ने कहा कि लोगों के प्रति उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हमने संसदीय समिति का गठन किया है जिसमें सभी दलों का प्रतिनिधित्व है। हमें वक्त दीजिए। श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कहा कि हम राष्ट्रमंडल के मूल्यों, मानवाधिकार तथा मीडिया की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं और इसीलिए हमने उत्तरी श्रीलंका में चुनाव कराए। हमारे यहां संसद है। हमने एक प्रवर समिति का गठन किया है। हमने लोगों से समाधान के संदर्भ में सुझाव देने को कहा है। एक व्यक्ति यह नहीं कर सकता। मैं अकेले यह नहीं कर सकता।

जाफना का दौरा करने वाले कैमरन ने बीते शुक्रवार को राजपक्षे से मुलाकात की थी। 1948 में श्रीलंका की आजादी के बाद पहली बार किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष ने जाफना का दौरा किया है। कैमरन ने कल कहा कि राजपक्षे के साथ निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच तथा तमिलों के साथ सुलह सहमति और उनके पुनर्वास के सहित सभी मुद्दों पर खुली बातचीत हुई।

कैमरन ने यहां चोगम सम्मेलन से अलग कहा था कि मैंने राष्ट्रपति राजपक्षे से कहा कि (लिट्टे के खिलाफ) युद्ध के आखिर में हुए घटनाक्रम की मार्च के अंत तक विश्वसनीय, पारदर्शी और स्वतंत्र आंतरिक जांच जरूरत है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं अपने पद का उपयोग संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग जाने और एक स्वतंत्र जांच के लिए अधिकार आयुक्त के साथ काम करने के लिए करूंगा।