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26 फरवरी, 2021|9:39|IST

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मुजीबुर रहमान हत्याकांड मामलाः सुनवाई प्रक्रिया के महत्वपूर्ण घटनाक्रम

बांग्लादेश के संस्थापक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान और उनके परिवार के सदस्यों की 1975 में की गई हत्या के मामले की सुनवाई प्रक्रिया के महत्वपूर्ण घटनाक्रम इस प्रकार हैं:

15 अगस्त 1975 : मुजीबुर रहमान और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या।

26 सितंबर 1975 : स्वयंभू राष्ट्रपति खोंदकर मुश्ताक अहमद ने बंगबंधु के हत्यारों को बचाने के लिए क्षतिपूर्ति अध्यादेश (इन्डेम्निटी आर्डिनेन्स) जारी किया। इसके बाद सत्तारूढ़ बीएनपी सरकार ने 1979 में क्षतिपूर्ति कानून के तौर पर अध्यादेश को मंजूरी दी।

23 जून 1996 : 21 साल के राजनीतिक वनवास के बाद शेख हसीना के नेतृत्व में अवामी लीग सत्ता में आई।

14 अगस्त 1996 : इस हत्याकांड के तीन आरोपी, बर्खास्त लेफ्टिनेंट कर्नल सैयद फारूक रहमान, बर्खास्त लेफ्टिनेंट कर्नल सुल्तान शहरियार राशिद खान और पूर्व मंत्री तहरूद्दीन ठाकुर गिरफ्तार।

दो अक्टूबर 1996 : इस हत्याकांड मामले में प्राथमिकी दर्ज।

तीन अक्टूबर 1996 : सीआईडी ने मामले की जांच शुरू की।

14 नवंबर 1996 : संसद ने हत्यारों के खिलाफ सुनवाई शुरू करने के लिए क्षतिपूर्ति कानून निरस्त किया।

21 जुलाई 1998 : अभियोजन पक्ष के 74 गवाहों की सूची में से अंतिम गवाह की सुनवाई तथा जांच अधिकारी अब्दुल कहार अखंड द्वारा की गई जिरह पूरी। कुल 61 गवाहों की सुनवाई हुई।

13 अक्टूबर 1998 : कुल 17 माह तक चली सुनवाई की प्रक्रिया 146 वें दिन समाप्त।

आठ नवंबर 1998 : जज काजी गुलाम रसूल ने 15 पूर्व सैन्य अधिकारियों को मत्यु दंड की सजा सुनाई।

14 दिसंबर 2000 : 28 दिन की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की पीठ ने विभाजित फैसला सुनाया। वरिष्ठ जज एम रूहुल अमीन ने 15 में से दस दोषियों की मत्यु दंड की सजा बरकरार रखी तथा एक अन्य जज एबीएम खरूल हक ने सभी 15 दोषियों को सुनाई गई मत्यु दंड की सजा की पुष्टि की।

12 फरवरी 2001 : विभाजित फैसले की वजह से यह मामला हाई कोर्ट की एक अन्य पीठ के पास भेजा गया और दोषियों को सुनाए गए, मत्यु दंड की सजा के फैसले पर सुनवाई तीसरे जज के समक्ष फिर से शुरू हुई।

30 अप्रैल 2001 : तीसरे जज मोहम्मद फजलुल करीम ने 12 दोषियों को सुनाई गई मत्यु दंड की सजा की पुष्टि की।

18 जून 2007 : अमेरिका से लौटे फरार दोषी पूर्व लेफ्टिनेंट एकेएम मोहिउद्दीन के खिलाफ सुनवाई शुरू।

चार अक्टूबर 2009 : मुख्य न्यायाधीश एमएम रूहुल अमीन ने अपील पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ गठित की।

12 नवंबर 2009 : 29 दिनों के बाद अंतिम सुनवाई समाप्त।

19 नवंबर 2009 : सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रखने की अपील खारिज की।

नौ जनवरी 2010 : पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल एकेएम मोहिउद्दीन, मोहिउद्दीन अहमद और पूर्व मेजर बजलुल हूदा ने राष्ट्रपति से क्षमा याचना की।

नौ जनवरी 2010 : राष्ट्रपति ने क्षमा याचिकाएं अस्वीकृत कीं।

10 जनवरी 2010 : पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नलों एकेएम मोहिउद्दीन तथा पूर्व मेजर बजलुल हूदा ने सुप्रीम कोर्ट की फैसले की समीक्षा के लिए पुनरीक्षण याचिकाएं दाखिल की।

11 जनवरी 2010 : पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल शहरियार राशिद खान ने पुनरीक्षण याचिका दाखिल की।

19 जनवरी 2010 : पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल सैयद फारूक रहमान और मोहिउद्दीन अहमद ने खुद को सुनाई गई सजा की समीक्षा की मांग की।

27 जनवरी 2010 : सुप्रीम कोर्ट ने पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज कीं।

27 जनवरी 2010 : पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल सैयद फारूक रहमान ने राष्ट्रपति के समक्ष क्षमा याचिका दाखिल की।

27 जनवरी 2010 : राष्ट्रपति ने क्षमा याचिकाएं खारिज कीं।

28 जनवरी 2010 : सभी पांचों दोषियों को फांसी दे दी गई।

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