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इन खंडहरों को दिख रही आबाद होने की राह

इन खंडहरों को दिख रही आबाद होने की राह

खंडहर कई कहानियां कहते हैं, कोई सुने तो सही...। तेलियानाला (आदमपुर) में चौहट्टा लाल खां और भारद्वाजी टोला के बीच यह मलबे का ढेर भी एक पुरानी कहानी कहता है। मशहूर फिल्म स्टार आमिर खां का यही ननिहाल है। उनकी मां जीनत हुसैन का बचपन इन्हीं गलियों में गुजरा। जीनत आज अस्सी बरस की हैं और आमिर उन्हें यह जगह उन्हें तोहफे में देना चाहते हैं। छह बिस्वा में फैले, खंड-खंड हो चुके इस खंडहर को आमिर की इस चाह में आबाद होने की राह जरूर नजर आ रही होगी।

इलाके के बुजुर्ग दिमाग पर जोर देकर अपने बुजुर्गों की यादें सुनाते हैं। तब छह बिस्वा की इस जमीन के पूर्वी छोर पर दोमंजिला कोठी और पश्चिम की तरफ बैठका और अहाता हुआ करता था। सामने बड़े दरवाजे पर 'ख्वाजा मंजिल' लिखा था। शायद मिर्जा जियाउद्दीन थे वो, जो अंतिम समय में बोल नहीं पाते थे। पार्टीशन के बाद परिवार संभवत: पाकिस्तान चला गया। 1947 में यह जमीन भारद्वाजी टोला के राजाराम गुप्ता और चौथीराम गुप्ता ने नीलामी में खरीद ली। दोनों भाइयों के सात बेटों में इस संपत्ति का बंटवारा हुआ। चौथीराम गुप्ता के सबसे छोटे बेटे और वार्ड-47 के पूर्व पार्षद बद्रीनारायण गुप्ता बताते हैं कि उनका परिवार भी कुछ वर्षों तक उसी ख्वाजा मंजिल में रहा। दीवारें कमजोर होती गईं और छत धसकने लगी तो परिवार नए घरों में शिफ्ट हो गया।

छह साल पहले 13 दिसंबर-2009 को आमिर 'थ्री ईिडयट्स' के प्रमोशन के लिए वाराणसी आए तो एक पंथ-दो काज कर लिए। आटो चालक रामलखन पासवान के साथ वह अपनी ननिहाल तलाशते हुए पहुंचे चौहट्टा लाल खां और इसी जमीन पर खड़े होकर मां से फोन पर बात की और उन्हें बताया कि जगह बहुत बड़ी है। बद्रीनारायण आमिर के जन्मदिन का पता चलने पर उन्हें बधाई देते हैं मगर आमिर की इच्छा जानने के बाद थोड़ा ठिठकते हैं। उनका कहना है कि आमिर के यहां से लौटने के बाद कई लोगों ने प्रापर्टी खरीदने की इच्छा जताई थी मगर परिवार अभी इसे किसी को देने के पक्ष में नहीं।

छह साल पुराने दोस्त को सबने कहा 'हैपी बर्थडे'
चौहट्टा लाल खां और भारद्वाजी टोला के लोगों के लिए 13 दिसंबर-2009 का वह दिन खास था। एक ठंडी सुबह मफलर बांधे, पान जमाए, बैग लिए एक शख्स आया और उनका दोस्त बन गया। बाद में पता चला कि वह आमिर खां थे। आमिर ने दोस्ती अच्छी तरह से निभाई थी। रास्ता दिखाने वालों को उन्होंने सोने की अंगूठी और अपने हाथ से लिखा पत्र भेजा था। छह साल पुराने इस दोस्त को इलाके के लोगों ने जन्मदिन की मुबारकबादें भेजी हैं।
आमिर को उनके ननिहाल तक ले जाने वाले नवाब कायम रजा अब इस दुनिया मंे नहीं हैं। नवाब इकलौते शख्स थे जिनकी बात आमिर ने अपनी मां से कराई थी और 'कैसी हो बहन' कहकर वह बिलख पड़े थे। बुजुर्ग सालिम रिजवी उस दिन को याद करते हैं। मसजिद के पास ही वह बैठे थे जब आमिर पहुंचे। पास के ही नन्हे मिर्जा कहते हुए हंस पड़ते हैं कि बाद में पता चला कि वो आमिर खां है। पान से मुंह लाल हो गया था, कोई पहचान नहीं सकता था उसे। हसन रजा, उनके बेटे जावेद और लल्लन खां भी काफी देर तक उस अनजान परदेसी का मकान ढूंढ़ने के लिए परेशान थे। मोहल्ले के ही शामिल रिजवी और अफसर जमाल भी इन चर्चाओं के बीच थे। वो भी अपने इस चहेते स्टार की सलामती की दुआ करते हैं।

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  • Web Title:seems to be way populate these ruins