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6 अप्रैल, 2020|12:58|IST

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राष्ट्रीय स्वयं संघ के विधान में राजनीति की व्यवस्था नहीं

राष्ट्रीय स्वयं संघ के विधान में राजनीति की व्यवस्था नहीं

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक अभय ने कहा कि संघ को पर्दे के पीछे से राजनीति को संबल देने वाले संगठन के रूप में प्रचारित किया जाता है। जबकि हमारा एक भी स्वयंसेक चुनाव नहीं लड़ता है। संघ के विधान में राजनीति की कोई व्यवस्था नहीं है। फिर भी कांग्रेस हमेशा डरी रहती है। हम अपने काम से जितना नाम नहीं कमा सके उतना राजनीति करने वालों ने हमारा प्रचार किया।

बीएचयू के केएन उडुप्पा सभागार में 'राष्ट्र निर्माण में स्वयंसेवक संघ की भूमिका: भ्रम और यथार्थ' विषयक संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की हत्या से लेकर आज तक संघ के प्रति कांग्रेस दुष्प्रचार कर रही है। जबकि जांच में भी साफ हो गया कि इसमें संघ की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने कहा कि संघ को समझना है तो उसकी कार्यप्रणाली को नजदीक से जानना होगा।

उन्होंने कहा कि शिक्षित उसे कहते हैं जो मानव मूल्यों को जिए। संघ के स्वयंसेवक मानव मूल्यों को जीते हैं, उनके संवाहक हैं, उनके संरक्षण के लिए काम करते हैं। संघ धर्म, संस्कृति, समाज की रक्षा सिखााता है। प्रांत प्रचारक ने कहा कि अंग्रेजों ने अपने अनुसार हमारा इतिहास लिखा है। इसमें संशोधन करना होगा। आखिर भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, खुदीराम बोस का लक्ष्य भी तो सिर्फ स्वतंत्रता प्राप्ति ही था।

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने कहा कि संघ एक बौद्धिक आंदोलन है। हिंदुत्व के अर्थ को समझने की जरूरत है। इससे पूर्व उद्धाटन सत्र में अतिथियों का परिचय प्रो. कौशल किशोर मिश्र ने और विषय परिचय प्रो. हेमंत कुमार मालवीय ने कराया।

संगोष्ठी को प्रो. संजीव कुमार शर्मा, प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी, प्रो. रजनीश शुक्ला, प्रो. एके जोशी, प्रो. आरपी पाठक, प्रो. आरपी सिंह, प्रो. अमरनाथ मोहंती, प्रो. एके उपाध्याय आदि ने संबोधित किया। दो दिवसीय संगोष्ठी में मेरठ, दिल्ली, गोरखपुर, जामिया इस्लामिया आदि विवि के शिक्षक और छात्र शिरकत कर रहे हैं।

अंग्रेजी में लगे बोर्ड पर कसा तंज

प्रांत प्रचारक ने कार्यक्रम स्थल पर पीछे अंग्रेजी में लगे बोर्ड पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि यहां हिंदी का कोई उल्लेख नहीं है लेकिन नेशन और राष्ट्र में काफी अंतर होता है। अगर चर्चा नेशन पर होगी तो निरर्थक होगी और राष्ट्र पर होगी तो सार्थक होगी।

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  • Web Title:Union legislation does not arrange themselves in national politics