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दशहरा की शाम शमी पेड़ से बरसेगी गिन्नी

खत्री समाज में विजयादशमी का विशेष महत्व है। इस दिन सुबह शस्त्र पूजा का विधान है। इस दिन की शाम सूर्योस्त के बाद शमी पेड़ की पूजा की जाती है। मान्यता है कि पेड़ से गिन्नी (धन-धान्य) की बारिश होगी। पेड़े का भोग लगाकर, लकड़ी का घोड़ा व हल्दी व चावल की लड्डू रखकर आरती उतारी जानी चाहिए। पेड़ के सम्मुख अपनी मनोकामना रखनी चाहिए।

ज्योतिष पं. विमल जैन ने पौराणिक कथा का आधार देते हुए बताया कि राजा रघू से एक ब्राह्मण ने सवा करोड़ गिन्नी दान में मांगा। राजा सन्यास ले चुके थे लेकिन दान से विमुख कैसे हो। तो वह अपनी आध्यात्मिक शक्ति का प्रयोग कर शमी पूजा किये और गिन्नी दान दिये। शेष गिन्नी बच गयी तो लोगों में बांट दिया। शमी पेड़ पूजन की मान्यता है। दशमी तिथि 11 अक्तूबर को पड़ रही है। विजयादशमी को अपराजिता वृक्ष की पूजा, नीलकण्ठ के दर्शन का भी विधान है। मान्यता यह भी है कि नीलकण्ठ बाबा विश्वनाथ प्रतीक में इस दिन दर्शन देते हैं।

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  • Web Title: Shami tree shall obtain Dussehra evening Guinea