नहीं रहे वरिष्ठ साहित्यकार डॉक्टर विवेकी राय, आज होगा अंतिम संस्कार

Last Modified: Tue, Nov 22 2016. 13:11 IST
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साहित्यकार व कथाकार डाक्टर विवेकी राय का मंगलवार की सुबह चार बजे निधन हो गया। एक सप्ताह पहले उन्हें बनारस के गैलेक्सी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आज दोपहर बाद बनारस में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

कुछ यादें

वरिष्ठ साहित्यकार डा. विवेकी राय का जन्म 19 नवंबर को  नरहीं थाना क्षेत्र के भरौली गांव में उनके मामा बसाऊ राय के घर वर्ष 1924 में हुआ था। डा. राय मूल रुप से गाजीपुर जिले के सोनवानी गांव के रहने वाले हैं। पिता शिवपाल के निधन के कारण डा. राय अपने ननिहाल में रहे और विभिन्न शिक्षा ग्रहण के बाद वर्ष 1942 में अपने गांव सोनवानी के लोअर प्राइमरी स्कूल के अध्यापक बने।

इस दौरान वह स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय रहे। वर्ष 1949 में धर्मदेव राय जूनियर हाईस्कूल के अध्यापक बने और वर्ष 1950 में सर्वोदय हाईस्कूल खरडीहा गाजीपुर में अध्यापक हुए। वर्ष 1965 में वह स्नातकोत्तर महाविद्यालय गाजीपुर में हिन्दी के अध्यापक हुए और वर्ष 1970 में उन्होंने पीएचडी की उपाधि ली। डा. राय ने कई उपन्यास, ललित निबंध, कहानी संग्रह आदि की रचनायें की और कई साहित्य के कई पुरस्कारों से पुरस्कृत भी हुए। 

मनबोधवा कहते थे उनके सहपाठी

डा. विवेकी राय जन्म से ही भरौली गांव स्थित अपने मामा बसाऊ राय के यहां रहते थे और इसी गांव के कई लोगों से मित्रता थी। गांव के योगेन्द्र राय, दयानंद राय आदि की मानें तो एक दैनिक समाचार पत्र में डा. साहब की कालम 'मनबोध मास्टर की डायरी' प्रकाशित होती थी। यह कॉलम उस जमाने में काफी प्रचलित थी लिहाजा उन्हें विवेकी नहीं मनबोधवा कहकर ही पुकारते थे। 

यह हैं डा. राय की रचनायें

डा. विवेकी राय की कई रचनायें काफी प्रचलित हुईं। उपन्यास में बबलू, पुरुष पुराण, लोकऋण, श्वेत पत्र, सोनामाटी, समरशेष है, मंगल भवन, नामामि ग्रामम, अमंगलहारी, देहरी के पार मशहूर रहे। ललित निबंध में फिर बैतलवा डाल पर, जुलूस रुका है, गंवई गंध गुलाब, मनबोध मास्टर की डायरी, बन तुलसी की गंध, आम रास्ता नहीं है, जमत तपोवन से कियो, जीवन अज्ञात का गणित है, चली फगुनाहट बौरे आम आदि थे। कहानी संग्रह में जीवन परिधि, गूंगा जहाज, नयी कोयल, कालातीत बेटे की बिक्री, चित्रकूट के घाट पर, सर्कस के अलावा कई कविता संग्रह आदि हैं। 

यश भारती समेत कई पुरस्कारों से हुए सम्मानित

डा. राय कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। इसमें उप्र हिन्दी संस्थान के प्रेमचंद पुरस्कार, साहित्य भूषण व महात्मा गांधी सम्मान, प्रदेश सरकार की ओर से यश भारती पुरस्कार, बिहार राजभाषा विभाग की ओर से शरद जोशी सम्मान, मानव संसाधन मंत्रालय के राहुल सांस्कृत्यायन पुरस्कार, विश्व भोजपुरी सम्मेलन का सेतु सम्मान, प्रांतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन का महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान आदि मिले।

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