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सुप्रीम कोर्ट में रामजन्मभूमि मामले की सुनवाई के लिए गठित की जाए अतिरिक्त बेंच

रामजन्मभूमि न्यास एक बार फिर वर्ष 1989 में कराए गए शिला पूजन की तर्ज पर देश भर के गांवों से राम मंदिर निर्माण का पत्थर जुटाने का अभियान शुरू करेगा। यह निर्णय न्यास कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक में किया गया।
 
अयोध्या के मणिराम छावनी में आयोजित न्यास कार्यकारिणी की बैठक में किए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए विहिप सुप्रीमो व न्यास के प्रमुख ट्रस्टी अशोक सिंघल ने कहा कि हम देश में शांति व्यवस्था को कायम रखना चाहते हैं, इसलिए कानून के राज के खिलाफ नहीं जा सकते। उन्होंने कहा कि रामजन्मभूमि का मामला सुप्रीम कोर्ट में लम्बित होने के कारण सबज्यूडिस है।

उन्होंने  आगे कहा कि संतों की मान्यता है कि रामजन्मभूमि का विषय अदालत का विषय नहीं है, लेकिन अब अगर अदालत के सामने लम्बित है, तो फिर कानून का सम्मान करना होगा। उन्होंने कहा कि इसीलिए संत चाहते हैं कि लम्बित विषय में शीघ्र फैसला आ जाए, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में बेंच गठित कर मामले की सुनवाई शुरू की जानी चाहिए।

सिंघल ने बताया कि जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती की अध्यक्षता में आयोजित न्यास की बैठक में निर्णय किया गया है कि शीघ्र ही देश भर के दानदाताओं से राम मंदिर निर्माण के लिए आवश्यक पत्थरों की मांग की जाएगी।

उन्होंने जानकारी दी कि राम मंदिर के प्रस्तावित माडल में दो लाख घनफुट पत्थरों की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि शिला पूजन के दौरान न्यास ने श्रद्धालुओं से सवा-सवा रुपए लिया था, जिससे सवा आठ करोड़ की राशि एकत्र हुई थी।

उन्होंने बताया कि न्यास के पास एकत्र राशि से करीब सवा लाख घनफुट पत्थरों की तराशी का कार्य पूर्ण करा लिया गया है।

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