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अधिकारियों से क्या होती थी बातचीत खुल जाएंगे राज

जेल में बंद शैलेंद्र अग्रवाल के पंद्रह-बीस मैसेज लीक हुए तो दो पूर्व डीजीपी आरोपों के कठघरे में आ गए। अधिकारी जगत में खलबली मच गई। शैलेंद्र के तीन मोबाइल फोन से लगभग पचास हजार मैसेज रिकवर हुए हैं।

डेटा रिकवरी के बाद इस बात की मैचिंग चल रही है कि जिन नंबरों पर उसकी चेट होती थी, वे किस-किसके हैं। सभी मैसेज खुल गए तो उत्तर प्रदेश के अधिकारी जगत में भूचाल आ जाएगा। ऐसे-ऐसे नाम सामने आएंगे जिनके बारे में लोगों ने कभी सोचा भी नहीं होगा।

शैलेंद्र अग्रवाल अब कोई मामूली अभियुक्त नहीं है। उसके सीने में ऐसे राज दफन हैं, जो उत्तर प्रदेश में भूचाल ला सकते हैं। वह खामोश है। अभी तक किसी के खिलाफ नहीं बोला है। उस पर दबाव पड़ा तो चुप्पी तोड़ भी सकता है। डेटा रिकवरी के बाद मैचिंग का काम बहुत ही गोपनीय रूप से चल रहा है।

जिस सेल में काम हो रहा है, वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता है। दो पूर्व डीजीपी के नाम जुड़ने के बाद अधिकारी और अलर्ट हो गए हैं। आगरा में तो सभी अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। आईजी, डीआईजी, एसएसपी कोई भी शैलेंद्र अग्रवाल के बारे में बात करने को तैयार नहीं है। क्या चल रहा है यह पूछने पर सभी खामोश हो जाते हैं।

सिर्फ इतना बोलते हैं कि जो मुकदमे दर्ज हैं उनकी विवेचना चल रही है। उसके किससे संबंध थे। यह सवाल सुनते ही अधिकारी खामोश हो जाते हैं। मतलब साफ है कि जांच की दिशा अब लखनऊ से तय हो रही है। प्रदेश सरकार भी नहीं चाहती है कि यह मामला ज्यादा तूल पकड़े। अधिकारियों पर कीचड़ उछलेगी तो कहीं न कहीं बदनामी प्रदेश सरकार की भी होगी। 

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