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शुरू से ही खर्चीला और शौकीन मिजाज का था शैलेन्द्र

जालसाजी कर लोगों का रुपया हड़पने वाला शैलेन्द्र अग्रवाल बचपन से ही शौकीन मिजाज व खर्चीले स्वाभाव का था। शुरू से ही उसमें पैसा कमाने की भी ललक बढ़ गई थी। दस साल पहले सपा व्यापार सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनकर मथुरा आने के बाद शैलेन्द्र अग्रवालसुर्खियों में आया था। उसके बाद से ही उसने व्यापारियों से रिश्ते बनाने शुरू किए और इस मुकाम तक पहुंचा। शुरू में परिवार के दो कोल्ड स्टोरेज थे ,जो अब बढ़ कर करीब चार से पांच तक हो गये हैं। मथुरा के लोगों के भी लाखों रुपये फंसे होने की चर्चा आम है, मगर किसी के सामने न आने से उसके खिलाफ यहां अभी तक कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी है।

मथुरा के प्रतिष्ठित परिवार से है ताल्लुक

पैसे की ज्यादा भूख ने भले ही शैलेन्द्र को दूसरी बार जेल के सींखचों के अंदर पहुंचा दिया है, लेकिन अगर उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात की जाये तो उसका ताल्लुक प्रतिष्ठित आलू वाले परिवार से है। उसके बाबा श्रीनाथ अग्रवाल आलू का व्यापार करते थे। पिता मुरारी लाल अग्रवाल आलू वाले एवं चाचा पृथ्वी अग्रवाल व बनवारी लाल अग्रवाल भी आलू का ही काम करते थे। होली वाली गली में इनका पुस्तैनी मकान था। होलीगेट स्थित गोविंदगंज मंडी में इनकी आढ़त थी। इसके बाद जमुनापार में लक्ष्मीनगर क्षेत्र के अलावा छिबरामऊ फर्रुखाबाद में भी कोल्ड स्टोरेज था। शैलेन्द्र शुरू से ही खर्चीले स्वभाव के साथ ही अति महत्वाकांक्षी था। वह गली के लड़कों से भी ज्यादा वास्ता नहीं रखता था, लेकिन जो उसके पास जाते थे तो उनके साथ खर्चा भी करता था।

दस वर्ष पूर्व-2004 से आया था सुर्खियों में शैलेन्द्र
शैलेन्द्र अग्रवाल मथुरा में कम ही रहा है। शैलेन्द्र को नेतागीरी का शौक चढ़ा तो वह सपा नेताओं के नजदीक आया। इसके बाद वह वर्ष-2003-2004 में सपा व्यापार सभा का प्रदेश उपाध्यक्ष बना और कुछ समय बाद ही राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनकर मथुरा आया था। मथुरा शहर में बड़े-बडे़ होर्डिंग्स लगवाये थे और पत्रकार वार्ता भी की थी। तभी इसकी पहचान अपने नाम से होने लगी। सूत्र बताते हैं कि उस दौरान कुछ सपाइयों ने इसका सीधे इतने बडे़ पद पर आने का विरोध भी किया था। इसके बाद ही व्यापारियों में अपने पैठ बनाने लग गया। वाकपटुता में तेज शैलेन्द्र ने आगरा में भी अपने सम्पर्क बनाये। फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

छिबरामऊ, लखनऊ और मथुरा में हुई पढ़ाई
शैलेन्द्र अग्रवाल पढ़ने में भी ठीक था। उसके पिता का छिबरामऊ (फर्रुखाबाद) में कोल्ड स्टोरेज था। वहीं इसने दसवीं तक की शिक्षा प्राप्त की। परिवार के साथ ही रहता था। इसके बाद 11 वीं और 12 वीं लखनऊ से करने के बाद बीकॉम केआर डिग्री कालेज मथुरा से की। फर्रुखाबाद से लेकर लखनऊ तक शिक्षा प्राप्त करने के साथ ही उसे नेतागीरी में दिलचस्पी होने लगी। इसी दौरान सपा के कुछ नेताओं से भी सम्पर्क बढ़ा।

महिन्द्रा की जीप से ऑडी तक का सफर
शैलेन्द्र अग्रवाल महंगे और लग्जरी वाहनों का भी शौकीन है। उसने शुरू में महिंद्रा की जीप खरीदी थी। अब टाटा सूमो, मारुति जेन, बलेनो, स्कॉर्पियो, क्वालिस, इनोवा, फार्च्यूनर, ऑडी आदि वाहन हैं। गाडि़यों को काफिले के साथ लेकर चलना उसका शगल रहा है।

बेटे की मौत के बाद टूट-सा गया था शैलेन्द्र
करीब नौ वर्ष पूर्व उसके बेटे की एक स्वीमिंग पूल में डूबकर मौत होने के बाद से वह बुरी तरह से टूट गया था। इसके बाद वह अपनी डैम्पियर नगर की कोठी छोड़कर कुछ समय वृन्दावन में रहा। बाद में आगरा शिफ्ट हो गया। 

मथुरा के लोगों के भी लाखों रुपये फंसे
मथुरा में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि करीब एक दर्जन लोगों से आलू में डबल मुनाफा देने के नाम पर लाखों रुपये ले रखे हैं। आगरा में जालसाजी के मामले तो खुलते गये, लेकिन यहां कोई सामने नहीं आ रहा है। इसका एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि देने वालों का भी नंबर दो का पैसा था। इसीलिए कोई रिपोर्ट दर्ज कराने को आगे नहीं आ रहा है।

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