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मणिपुर में शहीद हुआ फैजाबाद का लाल

गुरुवार को इम्फाल में भारतीय सैन्य दल पर हुए उग्रवादी हमले में शहर के सलारपुर निवासी 6 डोगरा रेजीमेन्ट के लांस नायक राम प्रसाद यादव की शहादत से यहां शोक की लहर दौड़ गई। शहीद यादव के घर पर तो जैसे खबर मिलते ही कोहराम मच गया। राम प्रसाद की पत्नी, बच्चे व भाई पछाड़ खा-खाकर गिरने लगे। ऐसे में उन्हे संभालना भी मुश्किल हो रहा था। राम प्रसाद के शहीद होने की खबर पाकर प्रशासनिक अधिकारियों, राजनेताओं व समाजसेवियों ने परिवार के आंसू पोछ कर उन्हे सांत्वना दिया। शहीद के घर पर पूरे दिन व रात तक शोक व्यक्त करने वाले लोगों का तांता लगा रहा है।

परिवार के सदस्यों के मुताबिक शहीद राम प्रसाद सात जून को इम्फाल से फैजाबाद अपने घर आने वाले थे। घर वाले उनके आने के दिन गिन रहे थे कि अचानक ह्रदय विदारक खबर सुनकर जैसे सभी पत्थर के हो गए। किसी को विश्वास नहीं हो रहा था। परिवार के मुताबिक गुरुवार की शाम  राम प्रसाद के ममेरे भाई कृष्ण कुमार यादव के मोबाइल पर इम्फाल से सैन्य अधिकारी का फोन आया कि लांस नायक राम प्रसाद यादव उग्रवादी हमले में शहीद हो गए हैं। उनके पार्थिव शरीर को शुक्रवार तक फैजाबाद पहुंचाने की भी बात कही गई। इसके बाद रात में पुन: फोन आया कि पोस्टमार्टम के बाद शरीर की स्थिति लाने लायक नहीं है। यह सुनकर कृष्ण कुमार ने परिवार के सदस्यों को सारी बात बताई। परिवार के आग्रह पर उन्हे रविवार तक शहीद राम प्रसाद के पार्थिव शरीर को लाने का आश्वासन मिला है।

स्थानीय डोगरा रेजीमेन्ट के जिम्मेदार सैन्य अधिकारी ने बताया कि उनके पास इस बारे में कोई अधिकारिक सूचना या निर्देश नहीं है। राम प्रसाद के शहीद होने की सूचना मिलते ही थाना कैन्ट एसओ आरएन सिंह मय दल-बल के शहीद के निवास पर पहुंच गए। शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने वालों में सांसद लल्लू सिंह, नगर विधायक तेज नारायण पाण्डेय, नगर पालिका के चेयरमैन विजय गुप्त, जिला पंचायत सदस्य गिरीश पाण्डेय डिप्पुल, एडीएम सिटी राम निवास शर्मा, एसपी सिटी आरएस गौतम व एसडीएम सदर अमित सिंह सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक व शुभ चिन्तक शामिल रहे।

बचपन से ही भारतीय सेना में जाने का संजोया था सपना
परिवार के सदस्यों के मुताबिक शहीद राम प्रसाद यादव बचपन से ही भारतीय सेना में जाना चाहते थे। उनके परिवार के कुछ लोग भारतीय सेना में थे। इनसे प्रेरित होकर राम प्रसाद ने भी सेना को ही अपना भविष्य चुना। देश भक्ति व देश सेवा के साथ भारतीय सेना का रुतबा हमेशा उनके दिलो दिमाग पर छाया रहता था। डोगरा रेजीमेन्ट की भर्ती में चयनित होकर राम प्रसाद सेना की वर्दी पहन कर खुद पर गर्व महसूस करते थे। खुश मिजाज राम प्रसाद के आने से पहले पूरा परिवार उनका बेसब्री से इंतजार करते हुए दिन गिन रहा था। उन्हें अपने बच्चों से बेहद प्यार था। चार भाइयो में तीसरे नम्बर पर राम प्रसाद को सभी बहुत चाहते थे। दो बेटी और तीन बेटों के साथ उनकी पत्नी व भाई की इंतजार करती आंखें रो-रो कर पथरा गई हैं। याद कर कर के कभी भाई तो कभी बेटी और कभी बेटा गश खाकर गिरते रहे। उन्हे अभी भी यकीन नहीं कि  राम प्रसाद देश पर शहीद हो गया है।
 
वो तो नहीं पर अब आएगा उनका पार्थिव शरीर
फैजाबाद हिन्दुस्तान संवाद। शहीदों की मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा। भारतीय सेना 6 डोगरा रेजीमेंट के जांबाज लांस नायक राम प्रसाद यादव की अब बस यादें शेष रह गई हैं। राम प्रसाद सात जून रविवार को छुप्तियों पर घर आने वाले थे। बड़ी बेसब्री से उनकी पत्नी व बच्चे उनके आने के दिन गिन रहे थे। रविवार को ही राम प्रसाद को घर आना था। परन्तु उनके आने से पहले  शहीद होने की खबर आ गई। जिस रविवार को उन्हे घर पहुंचना था,उसी रविवार को अब उनके पार्थिव शरीर को आना है। इंतजार तब भी था, इंतजार अब भी है। बस फर्क इतना है कि राम प्रसाद यादव अब तिरंगे में लिपटे अमर शहीद के रूप में घर पहुंचेंगे। जिन पर समूचे देश को गर्व है कि देश की खातिर जान कुर्बान कर देने वाला इस धरती का सपूत है। राम प्रसाद को सदियों तक उनकी जाबांजी के लिए याद किया जाएगा।

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