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शीलू रेप कांड: पूर्व बसपा विधायक पुरुषोत्तम द्विवेदी को 10 साल की सजा

सीबीआई की विशेष अदालत ने बांदा के बहुचर्चित शीलू दुराचार कांड में शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए बसपा के पूर्व विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी को 10 साल की सजा सुनाई है। बांदा के नरैनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे पुरुषोत्तम को अदालत ने बलात्कार का दोषी ठहराते हुए उन पर एक लाख का जुर्माना भी ठोंका है। 13 जनवरी, 2011 से विधायक पुरुषोत्तम इस मामले में न्यायिक हिरासत में निरुद्ध हैं। अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि जुर्माने की धनराशि पर आधे हिस्से की हकदार पीड़िता होगी।

विशेष जज वीके श्रीवास्तव ने दो अन्य मुल्जिमों रामनरेश द्विवेदी उर्फ रावण व वीरेंद्र कुमार शुक्ला उर्फ गर्ग को भी सजा सुनाई है। उन्हें पीड़िता के साथ मारपीट व छेड़छाड़ का दोषी करार देते हुए दो-दो साल की सजा से दंडित किया है। दोनों पर एक-एक हजार का जुर्माना भी ठोंका है। दो अन्य मुल्जिमों राजेंद्र शुक्ला व रघुवंश मणि द्विवेदी उर्फ सुरेश नेता को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। इन पर भी मारपीट व छेड़छाड़ का इल्जाम था।

अपने 79 पन्नों के फैसले में विशेष अदालत ने कहा है कि तफ्तीश से साफ है कि पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी ने पीड़िता को इच्छा के विरुद्ध घर में रखा, यह जानते हुए कि वह रज्जू पटेल से विवाह करके उसके साथ रह रही है। इसके साथ ही उन्होंने अपने दुष्कर्मों को छिपाने के लिए उसके ऊपर चोरी का मामला भी दर्ज कराया। इसकी विवेचना स्थानीय पुलिस ने उनके सियासी दबाव व प्रभाव में की लेकिन बाद में जब उनका सच सामने आया तो उनके विरुद्ध बलात्कार के मामले में आरोप पत्र दाखिल किया गया।

यह था मामला---
-12 जनवरी, 2011 को बांदा की अदालत के आदेश से एफआईआर थाना कोतवाली में दर्ज हुई थी। इसकी जांच थाना अतर्रा पुलिस को सौंप दी गई।
-पीड़िता दुराचार का आरोप न लगा सके इसकेलिए पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी ने उसे चोरी के आरोप में जेल भिजवा दिया था।
-विधायक पुरुषोत्तम का मोबाइल व कुछ नगदी चुराने के इल्जाम में 14 दिसंबर, 2010 को पीड़िता गिरफ्तार की गई थी।
-पीड़िता के खिलाफ विधायक के बेटे मयंक द्विवेदी ने अतर्रा थाने में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
-चार जनवरी, 2011 को जेल से अपनी तीसरी रिमांड पेशी के दौरान पीड़िता ने अदालत में एक अर्जी देकर विधायक पर घर में 8 दिसंबर, 2010 से 12 दिसंबर, 2010 तक दो बार बलात्कार करने का इल्जाम लगाया।
-दो जनवरी, 2011 को इस पूरे मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई थी। सीबीसीआईडी ने चोरी के मामले में शीलू को क्लीन चिट दे दी।
-15 जनवरी, 2011 को फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी जबकि 20 जनवरी, 2011 को विधायक समेत पांच अन्य मुल्जिमों के खिलाफ दुराचार, मारपीट व छेड़छाड़ की धाराओं में आरोपपत्र बांदा की अदालत में दाखिल किया गया। 
-12 सितंबर, 2011 को इरुदिया नाथन की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच सौंपी।
-सीबीआई के मुख्य विवेचक एएसपी आर.एन. मिश्रा और सह विवेचक व पैरवी अधिकारी इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने 16 जून, 2012 को सीबीआई ने विधायक पुुरुषोत्तम समेत तीन मुल्जिमों के खिलाफ बांदा की अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
-विधायक पुुरुषोत्तम पर बलात्कार जबकि मुल्जिम रामनरेश द्विवेदी उर्फ रावण व वीरेंद्र कुमार शुक्ला उर्फ गर्ग पर मारपीट व छेड़छाड़ का आरोप लगाया।
-सीबीआई की रिपोर्ट पर 10 अपै्रल, 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का ट्रायल बांदा की अदालत से लखनऊ की सीबीआई अदालत को स्थानांतरित कर दिया।
-20फरवरी, 2013 को लखनऊ की सीबीआई की अदालत ने पुरुषोत्तम समेत पांच मुल्जिमों के खिलाफ अलग अलग आरोप तय कर मामले की सुनवाई शुरू कर दी। 25 मई, 2015 को इस मामले की पूरी सुनवाई के प>ात सीबीआई की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था।

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