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नेपाल में सक्रिय जाली नोट तस्कर पांच लाख के नकली नोट के साथ गिरफ्तार

आतंकवाद निरोधी दस्ते ने नेपाल में सक्रिय जाली नोट के सबसे बड़े तस्कर और आईएसआई एजेंट महबूब अली उर्फ शेरू आलम को पांच लाख के नकली नोटों के साथ गोरखपुर में बस अड्डे से गिरफ्तार किया है। महबूब अली जहां आईएसआई से भारतीय जाली नोटों की बड़े खेप हासिल करता था, वहीं यूपी, बिहार और पश्चिमी बंगाल में भारतीय सैन्य संस्थानों की जासूसी भी करता था।

एटीएस ने बीती फरवरी में नेपाल के बड़े सुपारी किंग अल्ताफ हुसैन अंसारी के खास शेख जावेद इकबाल को गिरफ्तार किया था। एटीएस के आईजी राम कुमार ने बताया शेख जावेद से पूछताछ में उसके साथी महबूब अली की जानकारी हाथ लगी थी। वह अल्ताफ हुसैन अंसारी के साथ पाकिस्तान से नेपाल में भारतीय जाली नोट मंगवाता था और बिहार की रक्सौल व वीरगंज सीमा से जाली नोट भारत में पहुंचाता था।

यूं हुई गिरफ्तारी

शेख जावेद इकबाल ने पूछताछ में कबूला था कि इकबाल काना, मोहम्मद सफी उर्फ चाचा, मिर्जा इरशाद उर्फ भाई साहब का नेपाल में मुख्य कर्ताधर्ता वीरगंज के रहने वाले अल्ताफ अंसारी उर्फ मुन्ना व महबूब अली ही हैं। ये दोनों नेपाल में पाकिस्तानी दूतावास से संपर्क में रहते थे और पाकिस्तान से भारतीय जाली नोटों की बड़ी खेप हासिल कर यूपी, बिहार और अन्य राज्यों में पहुंचाते थे। सबसे खास बात यह थी कि महबूब हांगकांग, दुबई, मलेशिया और सिंगापुर के जरिये जाली नोटों की खेप कूरियर के जरिये मांगवाता था, ताकि कोई शक न कर सके।

ये दोनों आईएसआई द्वारा नेपाल में भेजे जाने वाले एजेंटों को शरण देने का काम करते थे। एटीएस ने जब इमरान तेली और शेख जावेद को गिरफ्तार कर लिया तब इन दोनों ने ही मुख्य कमान हाथ में ले ली। महबूब अली की सुरागरसी में एटीएस के इंस्पेक्टर टीबी सिंह की टीम को लगाया गया था। गोरखपुर में जब वह बस अड्डे से कहीं जाने की कोशिश में था, तभी धर लिया गया।

आईएसआई एजेंट महबूब का कबूलनामा
महबूब ने कबूला है कि वह 8 सालों से अल्ताफ हुसैन अंसारी के साथ जाली नोटों की तस्करी कर रहा था। पहले अल्ताफ उसे सिर्फ 5 फीसदी कमीशन देता था लेकिन बाद में दोनों आधे-आधे के साझेदार हो गए। पाकिस्तानी दूतावास के कहने पर ही अल्ताफ ने महबूब को सेवारत और रिटायर सैन्य कर्मियों के जरिये गोपनीय सूचनाएं भी हासिल करने में लगाया।

सैन्य संस्थानों की जासूसी के बदले बेटे को बनाया डाक्टर
भारतीय सैन्य संस्थानों की जासूसी करने के बदले में आईएसआई ने महबूब के बेटे को पाकिस्तान में एमबीबीएस की पढ़ाई मुफ्त में करानी शुरू कर दी। पाकिस्तानी अंडरवल्र्ड सरगना मिर्जा इरशाद उर्फ भाई साहब के कहने पर ही अल्ताफ हुसैन ने जाली नोटों के एक अन्य कारोबारी बलराम पटवा की हत्या करवा दी थी। शक था कि वह भारतीय एजेंसियों के लिए मुखबिरी करता है।

सौ चाइनीज पिस्तौलें भी भारत भेजी
महबूब अली ने कबूला है कि अल्ताफ ने पाकिस्तान से सौ चाइनीज पिस्तौलें भी हासिल की थीं। इनमें से ज्यादातर पिस्तौलों को किसी न किसी तरह भारत में भेजा गया। महबूब ने भी पांच पिस्तौलें ली थीं। अल्ताफ ने बिहार में रक्सौल और यूपी में वीरगंज सीमा पर सुपारी किलिंग, अपहरण और भारत से चोरी हुई गाड़ियों को नेपाल में भेजने का भी धंधा संभाल रखा था।

अब काना और चाचा हैं एटीएस के वांटेड
यूपी एटीएस को अब आईएसआई एजेंट हाफिज इकबाल उर्फ इकबाल काना, मोहम्मद सफी उर्फ चाचा, मिर्जा इरशाद उर्फ भाई साहब व अल्ताफ हुसैन अंसारी की तलाश है। अल्ताफ को फिलहाल नेपाल पुलिस ने बलराम पटवा की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।

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