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नवजात की मौत, प्रसूता की

जिला महिला अस्पताल के स्टाफ को किसी का भी खौफ नहीं है। चंद घंटे के भीतर हुई पांच नवजातों की मौत के कारणों की जांच करने आईं निदेशक परिवार कल्याण के जाने के अगले दिन ही एक प्रसूता को जबरन डिस्चार्ज कर दिया गया। उसका दोष सिर्फ इतना था कि सोमवार को उसने बच्चा जना था, जिसकी एक घंटे मौत हो गई।

सुनीता कुमार नाम की महिला एल-6 वार्ड के बेड नंबर 9 पर भर्ती थी। सुनीता ने बताया कि सोमवार को वह अस्पताल आई थीं। शाम पांच बजे उनका ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराया गया। इसके बाद नवजात की तबीयत बिगड़ी और एक घंटे बाद उसकी मौत हो गई।

सुनीता ने बताया कि नवजात की मौत पर उन्होंने या उनके घरवालों ने कुछ नहीं कहा। उन्हें जिगर के टुकड़े की मौत का अफसोस था, लेकिन भगवान की मर्जी मानकर उन्होंने कुछ नहीं कहा। वह अपना इलाज कराना चाहती थीं, लेकिन रात से ही अस्पताल से छुप्ती का दबाव बनाया जाने लगा। सुबह होते-होते जबरन से छुप्ती दे दी गई।

परिवारीजनों को बता दिया गया था कि बच्चा पेट में सड़ गया है। इसलिए मरा हुआ पैदा होने की बात सही नहीं है। मरीज को जबरदस्ती डिस्चार्ज करने की बात गलत है।
डॉ सुनीता कुमार, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला महिला अस्पताल

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