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आगरा विवि में मूल्यांकन करने पहुंच गए फर्जी परीक्षक

डॉ. अम्बेडकर विवि की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में मंगलवार को बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। विवि से संबद्ध कॉलेज के शिक्षक बनकर पहुंचे दो परीक्षकों को शक होने पर पकड़ लिया गया। दोनों शिक्षक फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर विवि की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए पहुंचे थे। मूल्यांकन कोऑर्डिनेटर द्वारा शैक्षिक प्रमाण पत्र मांगे जाने पर दोनों शिक्षक वहां से भाग गए।

खंदारी स्थित आईबीएस संस्थान को बीएससी का मूल्यांकन केन्द्र बनाया गया है। 31 मई से केन्द्र पर मूल्यांकन शुरू हुआ था। मंगलवार को मूल्यांकन केन्द्र पर दो शिक्षक फिजिक्स फाइनल इयर का मूल्यांकन करने पहुंचे। श्री फैयाज हुसैन पीजी कॉलेज, निधौली कलां का शिक्षक बताने वाले डॉ. प्रमोद कुमार और डॉ. सुनीता प्रतिहार ने प्राचार्य द्वारा जारी किया प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किया। इसके आधार पर उन्हें मूल्यांकन की अनुमति दे दी गई।

इसी बीच मूल्यांकन केन्द्र कोऑर्डिनेटर डॉ. हेमेन्द्र कुलश्रेष्ठ और डॉ. बिंदुशेखर सिंह दोनों शिक्षकों से बात करने लगे। उन्होंने शिक्षकों से पीएचडी कहां से की, किस टॉपिक पर पीएचडी, किस गाइड के अंडर में की और किस-किस कॉलेज में पढ़ाया है, जैसे सवाल पूछे। इन सवालों  पर शिक्षकों के चेहरे का रंग उड़ गया। शक होने पर कोऑर्डिनेटर ने उनसे पूछताछ शुरू की। इसमें सुनीता प्रतिहार ने बताया कि वह एमए इकोनॉमिक्स है और डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि उसने एमएससी कैमेस्ट्री से की है। वहीं प्राचार्य के पत्र पर भी वह इधर-उधर की बात करने लगे।

फर्जीवाड़े पर मुहर लगने के बाद दोनों परीक्षकों से कॉपियों के बंडल वापस ले लिए गए। शिक्षकों से उनके शैक्षिक प्रमाण मांगे। प्रमाण पत्रों के काउंटर पर रखे होने की बात कहकर दोनों उन्हें लेने गए। इसी बीच वह मूल्यांकन केन्द्र से भाग गए। प्रमाण पत्र लेकर न आने पर कोऑर्डिनेटर ने उनकी तलाश शुरू कराई। लेकिन तब तक वह वहां से भाग चुके थे।

डॉ. प्रमोद कुमार और डॉ. सुनीता प्रतिहार नाम के दो फर्जी शिक्षक पकडे़ गए थे। प्रमाण पत्र दिखाने के नाम पर वह भाग गए। उनके प्रमाण पत्रों को सील कर दिया गया है। मामले की जांच कराई जा रही है। कुलपति ने सभी कोऑर्डिनेटर्स को निर्देश दिए हैं कि शिक्षकों के प्रमाण पत्र के बारे में कॉलेज प्रचार्य से जानकारी जरूर ले ली जाए।
डॉ. मनोज श्रीवास्तव, पीआरओ, डॉ. भीमराव अम्बेडकर विवि

फिरोजाबाद से बनवाए थे प्रमाण पत्र
फर्जी परीक्षकों के प्रमाण पत्रों के बारे में जानकारी जुटाने पर बड़ा खेल सामने आया। मूल्यांकन केन्द्र कोऑर्डिनेटर डॉ. बिंदुशेखर शर्मा ने जब फर्जी परीक्षकों से उनके प्रमाण पत्रों के बारे में पूछताछ की, तो जो मामला सामने आया वह बेहद चौंकाने वाला था। फर्जी परीक्षकों ने बताया कि उन्होंने कॉलेज के प्राचार्य का लेटर, विवि अप्रूवल लेटर और अनुभव प्रमाण पत्र फिरोजाबाद की पारस कम्युनिकेशन नाम की दुकान से बनवाया था। सभी प्रमाण पत्रों के लिए एक-एक हजार रुपये दिए गए थे।

बड़े रैकेट का खेल तो नहीं यह फर्जीवाड़ा?
विवि के मूल्यांकन में परीक्षक बनकर आए अयोग्य शिक्षकों के पकड़े जाने के बाद इस मामले से बड़े कॉकस के जुड़े होने से सवाल खड़े हो गए हैं। अब ऐसे ही परीक्षकों के प्रदेश के दूसरे विवि के मूल्यांकन में भी लगे होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। जानकारों की मानें तो विवि के परिक्षेत्र के कॉलेज का शिक्षक बताने के कारण से यह मामला पकड़ में आ गया। विवि के मूल्यांकन में कॉलेज प्राचार्य के पत्र के आधार पर ही शिक्षकों को कॉपी जांचने की जिम्मेदारी दे दी जाती है। यदि प्राचार्य का लेटर ही फर्जी है, तो यह बहुत बड़ा मामला है।

कॉपियों के बोझ में दबे विवि के छूटे पसीने
उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन शुरू होने के साथ ही फर्जी परीक्षकों के पकड़े जाने से विवि में हड़कंप मच गया है। मूल्यांकन में फर्जीवाड़ा का खेल पकड़े जाने के बाद विवि अधिकारियों को पसीने आ गए हैं। पहले से ही मूल्यांकन के दबाव में विवि प्रशासन कॉलेजों में पढ़ा रहे शिक्षकों को परीक्षक नियुक्ति करने में भी पशोपेश में फंस गया है।

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