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महंगाई के पायदान पर फिर आगरा अव्वल

महंगाई के मामले में आगरा प्रदेश में एक बार फिर अव्वल बन गया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की तरफ से हाल में जारी किए गए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े तो यही कह रहे हैं। मतलब साफ है: आगरा के औद्योगिक श्रमिकों को अपनी गुजर-बसर के लिए प्रदेश के अन्य हिस्सों से ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ रही है।

अप्रैल 2015 की अवधि के लिए जारी इन आंकड़ों के अनुसार आगरा का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 263 रहा। बीते महीने की रिपोर्ट में कानपुर के साथ साझा रूप से अव्वल रहे आगरा के इंडेक्स में इस बार चार अंकों की बढ़ोतरी हुई। इससे पिछली रिपोर्ट में आगरा का इंडेक्स 259 था। इसी अवधि में कानपुर के इंडेक्स में दो अंक की बढ़ोतरी हुई और यह 261 के स्तर पर पहुंच गया है।

देश भर के 78 शहरों की सूची में प्रदेश के पांच शहर शामिल किए गए हैं। यदि जनवरी 2015 से रिपोर्ट को आधार बनाया जाए तो अन्य शहरों की तुलना में गाजियाबाद में महंगाई ने सबसे ऊंची छलांग लगाई है। यहां चार महीने में ही आंकड़ा 14 अंक बढ़ गया। वर्तमान में गाजियाबाद का इंडेक्स 255 है। राहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी के वाशिंदों को मिली है। यहां पिछली रिपोर्ट की तुलना में इंडेक्स में एक अंक की गिरावट दर्ज की गई है।

दिल्ली में राहत
महंगाई के मामले में देश की राजधानी दिल्ली भी आगरा से काफी पीछे है। अप्रैल महीने के लिए दिल्ली का इंडेक्स 229 दर्ज हुआ है। देश का औसत 256 है।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक खुदरा मूल्यों में आए उतार-चढ़ाव का सरकारी आईना है। इससे यह पता चलता है खुदरा बाजार में चुनिंदा आवश्यक वस्तुएं किस मूल्य पर मिल रही हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) निकालने के लिए चयनित वर्ग को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बाँटा जाता है। ये श्रेणियाँ हैं- औद्योगिक श्रमिक, खेतिहर श्रमिक और ग्रामीण श्रमिक। हर श्रेणी द्वारा रिटेल दामों पर खरीदी या उपयोग की गई वस्तुओं और सेवाओं को उनकी अहमियत के अनुरूप अंक दिए जाते हैं। औद्योगिक श्रमिकों के मामले में खान-पान, पान-तंबाकू, ईंधन-बिजली, आवास, कपड़े और अन्य को शामिल किया जाता है। इसका आधार साल 2001=100 को माना गया है।

मुनाफाखोर का खिताब मिला था
कुछ अरसा पहले आसोचाम (एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया) ने सब्जियों की महंगाई में मुनाफाखोरी को लेकर एक सर्वे किया था। मुनाफाखोरी में टॉप थ्री शहरों की सूची में आगरा भी शामिल रहा था। अव्वल नंबर पंजाब के अमृतसर को मिला। यहां थोक से रिटेल के दाम में 120 फीसदी से ज्यादा अंतर आया। दूसरा नंबर पंजाब के अबोहर का था जहां वृद्धि सौ फीसदी से ज्यादा की गई। आगरा में थोक से रिटेल तक 90 फीसदी से भी ज्यादा दाम बढ़ोतरी पाई गई।

चार साल से ज्यादा अव्वल रहा आगरा
हर महीने जारी होने वाले इन आंकड़ों में आगरा फरवरी 2009 से लेकर जून 2013 तक अव्वल रहा। जुलाई 2013 के आंकड़ों में कानपुर आगे निकला। मगर दो महीने बाद ही आगरा ने पीछे छोड़ दिया। इसके बाद से दोनों शहरों में कश्मकश की स्थिति जारी है। 
बीते चार महीनों का इंडेक्स
शहर     जनवरी     फरवरी    मार्च        अप्रैल   
आगरा      258    256     259        263       
गाजियाबाद 241         242        252        255       
कानपुर     257         259        259        261       
लखनऊ     248         248        253        255       
वाराणसी     253         254        258        257

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